Monday, September 14, 2026

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कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निशांत त्रिपाठी बोले:रात में 1-2 घंटे रील्स देखने की आदत से युवाओं में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा


रात में सोने के समय मोबाइल पर रील्स देखने और सोशल मीडिया चलाने की आदत युवाओं के स्वास्थ्य के लिए नई चिंता बन रही है। एक हालिया पब्लिकेशन का हवाला देते हुए पटना के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निशांत त्रिपाठी ने बताया कि मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल और स्क्रीन की रोशनी के संपर्क से शरीर के हार्मोनल सिस्टम में बदलाव को लेकर अध्ययन सामने आ रहे हैं। हालांकि मोबाइल स्क्रीन को सीधे हार्ट अटैक का कारण नहीं कहा जा सकता, लेकिन देर रात तक स्क्रीन देखने से दिमाग सक्रिय रहता है, नींद प्रभावित होती है और शरीर की प्राकृतिक लय बदलती है। इसके साथ बदलती जीवनशैली, धूम्रपान, तंबाकू और शारीरिक गतिविधि की कमी मिलकर हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती है। डॉ. निशांत रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित प्रिवेंटिव हार्ट समिट-2026 में शामिल होने पहुंचे थे, इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज युवा रात में भी मोबाइल पर सक्रिय रहते हैं। कई लोग सोने के समय बिस्तर पर लेटकर एक-दो घंटे तक रील्स और सोशल मीडिया देखते हैं। पहले ऐसी जीवनशैली नहीं थी। कोविड के बाद मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इसका असर लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ा है। हार्ट अटैक का जोखिम शुरू होने के साथ ही रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी मोबाइल और स्क्रीन टाइम को किस तरह देखते हैं?
– स्क्रीन टाइम का हार्ट अटैक से सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। लेकिन यह समझना होगा कि देर रात तक मोबाइल देखने से दिमाग लगातार सक्रिय रहता है और नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ता है। शरीर दिन में सक्रिय और रात में आराम के लिए बना है। देर रात तक स्क्रीन पर रहने से यह लय प्रभावित होती है। इससे शरीर में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य पर खराब असर डालें। इसलिए सोने के समय मोबाइल से दूरी जरूरी है। ऐसा भी देखा जाता है कि जांच रिपोर्ट सामान्य है, बावजूद लोगों को हार्ट अटैक हो गया?
– हां, ऐसा हो सकता है। ज्यादातर मरीजों में कोई न कोई जोखिम कारक होता है, लेकिन कुछ लोगों में सामान्य जांच के बावजूद बीमारी का खतरा रह सकता है। ऐसे चयनित मरीजों में एचएस-सीआरपी, एपो-बी और एलपी(ए) जैसे विशेष परीक्षण उपयोगी हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन से भी हृदय की नसों में कैल्शियम या प्लाक जमा होने का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हार्ट डिजीज का इलाज शुरू होने के बाद नहीं, बल्कि जोखिम शुरू होने के साथ ही रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है। बीमारी जिस दिन हार्ट अटैक के रूप में सामने आती है, उसकी शुरुआत कई साल पहले हो चुकी हो सकती है। हार्ट डिजीज से बचने के लिए आम आदमी क्या करे?
– सबसे जरूरी है कि बीमारी होने का इंतजार न करें। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा वजन, धूम्रपान, व्यायाम की कमी या परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास है तो व्यक्ति को पहले से ही जोखिम में मानना चाहिए। अपना ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन नियमित रूप से जांचते रहें। धूम्रपान और नशे से बचें, तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम करें।

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