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मोतिहारी के पिपरा कोठी स्थित वाटगंज में प्रस्तावित वाटर पार्क के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। एक ओर जहां स्थानीय किसान अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई संगठन वाटर पार्क के समर्थन में सामने आ गए हैं। दोनों पक्षों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। तीन पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे किसानों का कहना है कि वाटर पार्क के लिए प्रस्तावित भूमि उनकी पुश्तैनी है। वे तीन पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं, जो उनके जीवन-यापन का मुख्य साधन है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे और संघर्ष जारी रखेंगे। कई संगठन किसानों के आंदोलन का विरोध कर रहे दूसरी ओर, ‘झील बचाव संघर्ष समिति’ सहित कई संगठन किसानों के आंदोलन का विरोध कर रहे हैं। इन संगठनों का आरोप है कि किसान जिस जमीन को अपनी बता रहे हैं, वह वास्तव में सरकारी या झील की भूमि हो सकती है। वे वाटर पार्क के निर्माण को क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक बता रहे हैं और किसानों के आंदोलन को भ्रामक करार देते हुए इसके खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की है। इस बीच, ‘विशिष्ट नागरिक मंच’ ने भी वाटर पार्क के समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। मंच ने 11 बिंदुओं पर मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों की कटिंग संलग्न करते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की अपील की है। इस पूरे विवाद के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और इस विवाद का समाधान किस दिशा में होता है।
