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झारखंड की सरकारी नियुक्तियों में भरोसे के संकट की जिस कहानी ने 14वीं जेपीएससी से रफ्तार पकड़ी, उसकी गूंज अब पूरे भर्ती तंत्र तक पहुंच चुकी है। पीटी पर उठे सवालों से शुरू हुए विवाद की आंच 45 परीक्षाओं तक पहुंच गई है। झारखंड सरकार ने इनमें से 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया, जबकि 23 परीक्षाओं की जांच सीआईडी को सौंप दी। इस परीक्षा में भ्रष्टाचार इस कदर हुआ कि लोग चौंक उठे। एक ओएमआर शीटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें 48 सवालों के ही जवाब भरे गए थे, लेकिन उसका चयन हो गया। इसके बाद मामला तूल पकड़ा। जांच में पता चला कि गड़बड़ी करने वाले गिरोह ने सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को ओएमआर खाली छोड़ने को कह दिया था, जिसे परीक्षा के बाद भरा गया। जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी की कहानी इसलिए सबसे अहम है, क्योंकि इसमें विवाद रिजल्ट आने के बाद नहीं, बल्कि परीक्षा की उत्तर-कुंजी और परिणाम प्रक्रिया के दौरान ही भ्रष्टाचार दिखने लगा था। आयोग ने पहले मॉडल उत्तर-कुंजी जारी की, फिर अंतिम उत्तर-कुंजी और उसके बाद संशोधित उत्तर-कुंजी। 19 अप्रैल को 14वीं सिविल सेवा की पीटी हुई। इस परीक्षा का परिणाम दो जुलाई को आया और 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। इसके साथ ही परिणाम की प्रक्रिया, कटऑफ और आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठे। इसके बाद मामला ओएमआर तक पहुंचा। शिकायतों की जांच के लिए सफल अभ्यर्थियों से ओएमआर की कार्बन कॉपी मांगी गई। भर्ती एजेंसी टीडीपीएल भी इसी परीक्षा से विवादों में आया। जानिए…कैसे-कैसे विवाद हुए, अध्यक्ष-सदस्यों को देना पड़ा इस्तीफा रिजल्ट पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं जेपीएससी ने 2 जुलाई को पीटी का रिजल्ट जारी किया। 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए। पीटी के रिजल्ट पर आयोग के तीनों सदस्यों ने असहमति जताते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। सदस्यों का कहना था कि 10 ओएमआर शीट की फॉरेंसिक जांच करने का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा। तीनों सदस्यों की असहमति ने परिणाम की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। कटऑफ जारी नहीं होने पर उठे सवाल पीटी रिजल्ट के बाद अभ्यर्थियों ने श्रेणीवार कटऑफ जारी नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। इनका कहना था, कटऑफ का सार्वजनिक न होना संशय पैदा करता है। पीटी रिजल्ट के 16 दिन बाद मेन्स का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया, जिससे संदेह और बढ़ गया। उत्तर-कुंजी एक बार नहीं, दो चरणों में बदली यह 14वीं जेपीएससी विवाद का सबसे ठोस दस्तावेजी हिस्सा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर 14वीं परीक्षा के लिए 21 अप्रैल को मॉडल उत्तर-कुंजी, 26 मई को अंतिम उत्तर-कुंजी और 19 जून को संशोधित उत्तर-कुंजी जारी की गई। पेपर-1 में 2 प्रश्न ड्रॉप किए गए। पेपर-2 में भी 2 प्रश्न ड्रॉप किए गए। कई प्रश्नों के विकल्प बदले गए। ओएमआर पर सवाल उठे तो सीआईडी ने मांगी कार्बन कॉपी पीटी रिजल्ट के बाद सोशल मीडिया पर ओएमआर शीट वायरल हुई। इसमें कम उत्तर भरने के बाद भी सफल होने जैसे दावे किए गए। इसके बाद सीआईडी ने जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पीटी क्वालिफाई सभी अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट का कार्बन कॉपी भेजने के लिए कहा। ओएमआर शीट की प्रारंभिक जांच में भी सीआईडी को गड़बड़ियां मिली। कुछ ओएमआर शीट ऐसे थे, जिन्हें परीक्षा के दौरान खाली छोड़ा गया था, बाद में सही उत्तर भरे गए। टीडीपीएल की भूमिका जांच के केंद्र में आई 14वीं जेपीएससी की पीटी रिजल्ट के बाद टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) की भूमिका जांच के केंद्र में आ गई। इस एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कारनामे जगजाहिर है। गड़बड़ियों की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया। अध्यक्ष समेत तीनों सदस्यों का इस्तीफा पीटी रिजल्ट के बाद शुरू सीआईडी जांच का दायरा बढ़ता ही गया। तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने 22 जुलाई को इस्तीफा दिया। फिर तीनों सदस्यों अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद ने भी इस्तीफा दे दिया। विज्ञापन से लेकर पीटी रिजल्ट तक
