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झारखंड में पिछले चार महीने से टेक होम राशन (टीएचआर) के बंद होने की खबर पर केंद्र सरकार ने समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग को ई-मेल भेज कर एक्शन-टेकेन रिपोर्ट मांगी है। 29 जून को दैनिक भास्कर में छपी खबर की कटिंग अटैच करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ऐसी स्थिति के उत्पन्न होने का कारण पूछा है। इस बीच केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह से फोन पर बात कर कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी। पूछा कि 13 लाख महिलाओं और बच्चों को आहार नहीं मिल रहा है, आखिर राज्य सरकार इतना संवेदनहीन कैसे हो सकती है, जब राज्य के 24 में से 17 जिलों में कुपोषण की स्थिति गंभीर है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उमाशंकर सिंह ने स्वीकार किया कि पिछले अप्रैल से टेक होम राशन का वितरण बंद है। विभागीय सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि शीघ्र ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि झारखंड में इस योजना का लाभ लेनेवाली गर्भवती महिलाओं की संख्या 1 लाख 45 हजार 385, धात्री महिलाओं की संख्या 1 लाख 15 हजार 857 और छह महीने से तीन साल तक के बच्चों की संख्या 10 लाख 32 हजार 804 है। इनकी कुल संख्या 12 लाख 94 हजार 46 है। इस योजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों 50:50 प्रतिशत की राशि देती हैं। टीएचआर नहीं मिलने का कारण और इसका समाधान इंटरलिंक्स फूड्स प्रालि., आदित्य फ्लोर लि. और कोटा दाल मिल टेक होम राशन की आपूर्ति करती हैं। इन तीनों कंपनियों को राज्य के 24 में से 8-8 जिले आवंटित किए गए हैं। टीएचआर देने की इनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में न तो उन्हें वर्क आर्डर दिया जा रहा है और न ही यह एजेंसियां पोषाहार की आपूर्ति ही कर रही हैं। पिछले साल दिसंबर में इन एजेंसियों को अवधि विस्तार दिया गया था। पर, अभी न तो अवधि विस्तार की कोई सूचना है और न ही नया टेंडर निकालने का प्रस्ताव है। हालांकि समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने बताया कि उक्त तीनों एजेंसियों को अवधि विस्तार देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पर विभागीय मंत्री की सहमति मिल चुकी है। कैबिनेट से शीघ्र ही इसे पारित होने की उम्मीद है। टेक होम राशन में क्या-क्या मिलता है टेक होम राशन (टीएचआर) में मुख्य रूप से फोर्टिफाइड (पोषक तत्वों से भरपूर सूखा राशन) होता है। लाभार्थियों को दाल, मूंगफली, गुड़ और स्थानीय अनाज जैसे पौष्टिक तत्वों से बने पैकेट दिए जाते हैं। यह राशन गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों (6 महीने से 3 साल तक) को पोषण देने के लिए दिए जाते हैं, ताकि उनका कुपोषण दूर हो सके। इसका उद्देश्य बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाना है। यह सूखे राशन के रूप में दिया जाता है, ताकि लाभार्थी इसे घर ले जाकर खा सकें। फूड सिक्यूरिटी एक्ट का उल्लंघन : अन्नपूर्णा
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि यह स्थिति शर्मनाक और फूड सिक्यूरिटी एक्ट का उल्लंघन है। जब राज्य सरकार को यह पता है कि आपूर्ति करने वाली एजेंसी की अवधि मार्च तक है, तो उन्हें मार्च तक यह निर्णय ले लेना चाहिए था कि अब आपूर्ति की व्यवस्था क्या होगी। दरअसल झारखंड सरकार की प्राथमिकता सूची में महिलाएं और बच्चे हैं ही नहीं।

