Tuesday, August 25, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

कॉपी में 98 तो मार्कशीट में 90 अंक दर्ज:भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बीच सरकार ने 23 परीक्षाओं की जांच के निर्देश दिए


झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बीच सरकार ने 23 परीक्षाओं की जांच के निर्देश दिए हैं। इनमें जेपीएससी छठी सिविल सेवा परीक्षा-2016 भी शामिल है। पीटी से लेकर मुख्य परीक्षा तक यह विवादों में रही। परीक्षा के परिणाम में दो बार संशोधन किया गया, जिससे सफल अभ्यर्थियों की संख्या सात गुना तक बढ़ी गई। वहीं मुख्य परीक्षा की मेरिट और अंत में चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति तक हर चरण पर सवाल उठे। इस परीक्षा में कॉपी और मार्कशीट में अंक में भी अंतर मिले। अभ्यर्थी विकास कुमार ने सीआईडी महानिदेशक को दिए आवेदन में दावा किया कि उनकी पेपर-3 उत्तर-पुस्तिका में 98 अंक, जबकि अंकपत्र में 90 अंक दर्ज हैं। इसके अलावा पेपर-पांच के 40 अंकों के प्रश्न में 2 अंक देने पर भी आपत्ति जताई है। इतना ही नहीं, दूसरे प्रश्न में उत्तर-पुस्तिका पर 19+3 यानी 22 अंक मिले हैं, जबकि अंक पत्र में 20 अंक दर्ज है। विकास को सिर्फ एक अंक के लिए साक्षात्कार से बाहर कर दिया गया। यही नहीं, क्वालिफाइंग अंक जोड़कर मेरिट लिस्ट बना दी गई। अभ्यर्थियों ने आयोग को इससे अवगत कराया, पर कोई नतीजा नहीं निकला। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया भी विवादों में आ गई और आखिरकार मामला कोर्ट पहुंच गया। जानिए: कैसी-कैसी गड़बड़ियां सामने आईं, पीटी पास 5138 से बढ़कर 34,634 हो गए… 23 फरवरी 2017 को पीटी का पहला परिणाम जारी हुआ, जिसमें 5,138 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई हुए। 11 अगस्त 2017 को संशोधित परिणाम जारी हुआ, जिसमें सफल अभ्यर्थियों की संख्या बढ़कर 6,103 हो गई। इसके बाद 12 फरवरी 2018 के निर्णय के अनुसार पीटी में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स लागू किया गया। इससे छह अगस्त 2018 को पीटी का फिर संशोधित रिजल्ट जारी किया गया, जिससे पीटी पास की संख्या 6,103 से बढ़कर 34,634 हो गई। परीक्षा शुरू होने के बाद नियम बदले…
पीटी पास अभ्यर्थियों की संख्या में सात गुना तक वृद्धि के बाद विरोध शुरू हो गया। सड़क से शुरू हुआ विरोध हाईकोर्ट तक पहुंचा। याचिका के माध्यम से कहा कि क्या परीक्षा हो जाने के बाद चयन के नियम और क्वालिफाईंग मार्क्स की व्याख्या बदली जा सकती है? इधर विवादों के बीच आयोग द्वारा 28 जनवरी से 1 फरवरी 2019 तक मुख्य परीक्षा आयोजित करा ली गई। हिंदी-अंग्रेजी के अंक भी जोड़ दिए गए… मुख्य परीक्षा के सामान्य हिंदी और अंग्रेजी प्रश्नपत्र में मिले अंक को जोड़कर मेरिट लिस्ट तैयार की गई, जबकि देश भर के अन्य आयोगों में क्वालिफाइंग अंक नहीं जोड़ा जाता है। अभ्यर्थियों के बीच क्वालिफाईंग अंक जोड़ने को लेकर बहस तेज हो गई। क्वालिफाईंग अंक जोड़ने का विरोध करते हुए अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू कर दिया, जो कई दिनों तक चला था। मामला अदालत तक पहुंचा था। हाईकोर्ट ने रिजल्ट रद्द किया, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा आयोग द्वारा 21 अप्रैल 2020 को अंतिम परिणाम जारी हुआ, जिसमें 325 अभ्यर्थी चयनित हुए। लेकिन 7 जून 2021 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अंतिम मेरिट सूची रद्द कर दी। इससे सभी 326 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां संकट में आ गईं। 23 फरवरी 2022 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया, जिससे नौकरी बच गईं। विज्ञापन से फिर जांच के आदेश तक का सफर

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles