Tuesday, April 28, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

कोडरमा की 90 महिलाएं 'लाह' से बना रही प्रोडक्ट:कभी पलायन के लिए जाना जाता था गांव, अब हुनर से बदल रही तस्वीर


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोडरमा जिले के महुआदोहर गांव की महिलाओं की कहानी प्रेरणा देने वाली है। कभी अभ्रक उद्योग के बंद होने के कारण यह गांव बड़े पैमाने पर पलायन के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यही गांव महिलाओं की मेहनत और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रहा है। यहां की महिलाएं लाह के उत्पादन और उससे बनने वाले उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही हैं। घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ इन महिलाओं ने अपने हुनर को पहचानकर एक नई शुरुआत की, जिसने पूरे गांव की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 90 महिलाओं ने सीखा लाह से उत्पाद बनाना समूह की सदस्य रिंकी देवी बताती हैं कि राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान और नाबार्ड के सहयोग से महुआदोहर गांव की करीब 90 महिलाओं को लाह के उत्पादन और उससे विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को लाह से जुड़ी बारीकियां सिखाई गईं, जिससे वे कुशल कारीगर बन सकीं। इसी प्रशिक्षण का परिणाम है कि आज ये महिलाएं आकर्षक लाह की चूड़ियों के साथ-साथ कई तरह की सौंदर्य प्रसाधन सामग्री भी तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय ने उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर जीवनशैली देने में सक्षम हो रही हैं। संकट के दौर में लिया निर्णय, आज बन गई पहचान समूह की सदस्य संगीता कुमारी बताती हैं कि जब अभ्रक उद्योग बंद हुआ, तब गांव के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। पलायन तेजी से बढ़ रहा था। उसी समय उन्होंने लाह उत्पादन से जुड़ने का फैसला लिया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन गांव की महिलाओं ने एकजुटता और मेहनत के बल पर इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। आज वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ कामकाजी महिला होने का गर्व महसूस करती हैं। यह पहल केवल रोजगार का साधन नहीं बनी, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान को भी मजबूत करने का माध्यम बन गई। सहयोग से बढ़ा हौसला, अब बड़े बाजार की तलाश राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान के सचिव मनोज दांगी बताते हैं कि इन महिलाओं ने शून्य से शुरुआत कर आज एक मजबूत पहचान बनाई है। उनकी प्रगति लगातार जारी है। वर्तमान में ये महिलाएं 50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की लाह की चूड़ियां तैयार कर रही हैं। यदि इन उत्पादों को बड़ा बाजार मिल जाए तो मांग और मुनाफा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। महिलाओं के हौसले को देखते हुए मुख्यमंत्री कुटीर उद्योग योजना के तहत इस समूह को 5 लाख रुपए का एक किट भी उपलब्ध कराया गया है। महुआदोहर वही गांव है, जहां की रानी मिस्त्री की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी कर चुके हैं। आज यह गांव महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनता जा रहा है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles