Monday, July 13, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

कोडरमा के कुणाल ने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार:मस्तिष्क-आंखों से उपकरण नियंत्रित करने का 'काया-न्यूरोसिंक' प्रोजेक्ट किया तैयार


कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया निवासी मैकेनिकल इंजीनियर और युवा इनोवेटर कुणाल अम्बष्टा ने अपने ‘काया-न्यूरोसिंक’ प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। यह तकनीक मस्तिष्क की तरंगों और आंखों की गतिविधि से उपकरणों को नियंत्रित करने में सक्षम है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) मुख्यालय में आयोजित स्वदेशी उद्यमी और इनोवेटर्स महोत्सव-2026 में उनके इस अभिनव प्रोजेक्ट को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह प्रतियोगिता इग्नू के नेशनल सेंटर फॉर इनोवेशन इन डिस्टेंस एजुकेशन और स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन साइंस द्वारा आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में देशभर से चुने गए शीर्ष 16 राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में से कुणाल के इनोवेशन को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए महत्वपूर्ण है। कुणाल अम्बष्टा ने बताया कि ‘काया-न्यूरोसिंक’ एक ओपन-सोर्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर आधारित एडवांस्ड ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस समाधान है। यह तकनीक पूर्ण रूप से लकवाग्रस्त या गंभीर अक्षमता से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी है। यह डिवाइस शरीर के बायो-पोटेंशियल सिग्नल्स, जैसे मस्तिष्क की तरंगें और आंखों की गतिविधि को पढ़कर, बिना बोले या शारीरिक स्पर्श के व्हीलचेयर, रोबोटिक आर्म और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित कर सकती है। कुणाल के अनुसार, यह नवाचार विदेशी मेडिकल उपकरणों की तुलना में कम लागत पर अत्याधुनिक समाधान प्रदान करेगा, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। इस प्रोजेक्ट की नींव नीति आयोग की कम्युनिटी इनोवेटर फेलोशिप के दौरान आईएसएम धनबाद के मार्गदर्शन में रखी गई थी। उन्होंने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट की फंडिंग अपनी पॉकेट मनी और विभिन्न हैकाथॉन से जीती गई पुरस्कार राशि से की थी।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles