Saturday, June 13, 2026

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कोडरमा में गर्मी से दुधारू पशुओं का डाइट प्लान बदला:दूध उत्पादन और स्वास्थ्य सुधारने के लिए तरबूज-खीरा, चुकंदर शामिल


कोडरमा में बढ़ती गर्मी का असर दुधारू पशुओं पर भी दिख रहा है। तापमान में लगातार वृद्धि के कारण पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए, कोडरमा गौशाला में दुधारू गायों के आहार योजना में बदलाव किया गया है। जिले में पारा बढ़ने के साथ ही इंसान और पशु-पक्षी दोनों गर्मी से जूझ रहे हैं। जहां लोग एयर कंडीशनर और ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं, वहीं पशुपालक भी अपने पशुओं को गर्मी से बचाने के विशेष उपाय कर रहे हैं। गौशाला के प्रबंधक अनंत चंद्रा ने बताया कि गर्मी की शुरुआत में गायों के दूध उत्पादन में कमी आई थी। इसके अतिरिक्त, कई गायों में तेज सांस लेने और पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी जा रही थीं। पशु चिकित्सकों की सलाह पर गौशाला में दुधारू गायों के आहार में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब उन्हें नियमित रूप से पानी से भरपूर फल और सब्जियां दी जा रही हैं। गायों के आहार में चुकंदर, खीरा और तरबूज जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए गए हैं। इन्हें दिन में अलग-अलग समय पर दिया जा रहा है ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो और उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। भिंगोकर दें कुट्टी चोकर, पाचन होता है बेहतर अनंत चंद्रा ने बताया कि गर्मी में सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन की होती है। जिससे पशु कमजोर हो जाते हैं और दूध उत्पादन घट जाता है। इसलिए उनके खाने में ऐसे तत्व शामिल किए हैं जो शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें। इसके अलावा गायों को चोकर और कुट्टी भी पानी में भिगोकर दी जा रही है। जिससे उनका पाचन बेहतर हो और शरीर में गर्मी का प्रभाव कम पड़े। उन्होंने बताया कि इस नए डाइट प्लान का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। पहले जहां गायें सुस्त और परेशान नजर आती थीं। वहीं अब उनकी स्वास्थ्य में सुधार भी देखा जा रहा है। दूध उत्पादन में भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। सूखा चारा खिलाने से बचें अनंत चंद्रा ने पशुपालकों को सलाह दी कि इस मौसम में पशुओं को सूखा चारा देने से बचना चाहिए। सूखा चारा न सिर्फ शरीर में पानी की कमी करता है। बल्कि पाचन के दौरान शरीर में अतिरिक्त गर्मी भी पैदा करता है। जिससे पशु और अधिक परेशान हो सकते हैं। इसके बजाय पशुओं को अधिक से अधिक पानी पिलाना चाहिए और चारे को भिगोकर खिलाना चाहिए। यदि संभव हो तो हरी घास का उपयोग अधिक मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि यह न केवल पोषण देता है बल्कि शरीर में हाइड्रेशन भी बनाए रखता है।

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