
कोलकाता से मनोरंजन कुमार सिंह की रिपोर्ट
कलकत्ता हाइकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद मकान पर बुलडोजर चलाने घर तोड़ने पर उत्तर 24 परगना की भाटपाड़ा नगरपालिका और पुलिस की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने भाटपाड़ा नगरपालिका के प्रशासक और भाटपाड़ा थाने के ओसी को गुरुवार दोपहर दो बजे कोर्ट में सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया है.
चार अगस्त तक कोर्ट ने लगायी थी रोक
जानकारी के मुताबिक, मामला कारी आवेदक जितेंद्र कुमार राउत भाटपाड़ा के निवासी हैं. एक जूट मिल प्रबंधन की ओर से शिकायत की गयी थी कि आवेदक ने मिल की जमीन पर अवैध रूप से मकान बना लिया है. इसी आधार पर भाटपाड़ा नगरपालिका ने मकान तोड़ने का फैसला लिया. इस फैसले को चुनौती देते हुए जितेंद्र कुमार राउत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने मामले की सुनवाई तक घर तोड़ने पर चार अगस्त तक रोक लगा दी थी.
प्रशासन ने कहा- देर से मिली जानकारी
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी तोड़फोड़ जारी होने का आरोप लगाते हुए आवेदक के वकील सप्तांशु बसु ने बुधवार को कोर्ट का ध्यान दिलाया कि स्टे ऑर्डर के बावजूद नगरपालिका और पुलिस घर तोड़ने का काम जारी रखे हुए हैं. इस पर नाराज न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने दोपहर 2:30 बजे प्रशासक को वर्चुअली हाजिर होने को कहा. इस संबंध में प्रशासक ने कहा कि उन्हें आधे घंटे पहले ही कोर्ट के आदेश की जानकारी मिली.
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प्रशासन का व्यवहार अदालत की अवमानना
प्रशासक के बयान पर जज ने कड़े शब्दों में कहा कि “सुनवाई के समय नगरपालिका के वकील मौजूद थे, ऐसे में नगरपालिका को आदेश की जानकारी पहले से होनी चाहिए थी.” जवाब से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने गुरुवार को दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. जज ने नगरपालिका के इस कदम को “अदालत की अवमानना” करार दिया. अब गुरुवार को प्रशासक और ओसी को कोर्ट में आकर बताना होगा कि स्टे के बावजूद तोड़फोड़ क्यों जारी रखी गयी.
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