
Chorbagan Stampede SIT: पश्चिम बंगाल सरकार ने राजधानी कोलकाता के चोरबागान सर्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी (17 अक्टूबर) की शाम हुई भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत की जांच के लिए 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है. कलकत्ता हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस अनिंदिया रॉय सरस्वती इस उच्चस्तरीय एसआईटी की अध्यक्ष बनायी गयीं हैं. टीम को 90 दिन में जांच करके विस्तृत रिपोर्ट और अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है. राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने बुधवार को यह जानकारी दी.
कोलकाता पुलिस और KMC के अधिकारी जांच दल से बाहर
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पूर्व घोषणा के मुताबिक, घटनास्थल के अधिकार क्षेत्र वाली कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम (KMC) के किसी भी अधिकारी को एसआईटी में शामिल नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है.
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SIT में शामिल किये गये ये 6 लोग
- न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती जांच दल की अध्यक्ष
- आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव
- पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के डीजीपी और आईजीपी
- पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख का एक प्रतिनिधि (अतिरिक्त महानिदेशक स्तर से नीचे का नहीं)
- गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का एक प्रतिनिधि (संयुक्त सचिव स्तर से नीचे नहीं)
- कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का एक प्रतिनिधि
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SIT इन 7 बिंदुओं पर करेगी जांच
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशपत्र में एसआईटी के लिए जांच के बिंदु और जिम्मेदारी भी तय कर दी गयी है, जो इस प्रकार है.
- क्या पंडाल और उसके आसपास जुटी भीड़ निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक थी?
- अचानक बारिश, बिजली आपूर्ति में बाधा और ‘पंडाल ढहने’ की अफवाहों की क्या भूमिका रही?
- प्रवेश और निकास द्वारों के अपर्याप्त इंतजामों और कॉमन पैसेज का तकनीकी मूल्यांकन.
- 30 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, आम लोगों के वायरल मोबाइल वीडियो, फॉरेंसिक निष्कर्ष, पुलिस कंट्रोल रूम के लॉग बुक और कॉल रिकॉर्ड्स का ऑडिट.
- क्या पूजा आयोजकों ने कोलकाता पुलिस और अग्निशमन विभाग से आवश्यक एनओसी (NOC) और स्वीकृत नक्शे के अनुसार काम किया था?
- पुलिस, निजी बाउंसरों, स्वयंसेवकों, एम्बुलेंस, दमकल और अस्पतालों की प्रतिक्रिया व टाइम-मैपिंग की जांच.
- राज्य में बड़े दुर्गा पूजा आयोजनों में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा नियमों की सिफारिश करना.
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