
कोलकाता. देश में औसतन हर एक हजार नवजातों में करीब नौ बच्चों में जन्मजात सुनने की समस्या सामने आती है. इनमें लगभग चार बच्चों में यह समस्या गंभीर हो सकती है. समय रहते जांच और उपचार मिलने पर ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन जीने के साथ अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल करने का अवसर मिल सकता है. इसी उद्देश्य से राज्यभर में नवजात बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच शुरू की जा रही है.
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सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स-सीएमआरआइ के ईएनटी एवं कॉक्लियर इंप्लांट सर्जन डॉ एनवीके मोहन ने बताया कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में स्थिति और गंभीर है. ऐसे बच्चों में प्रति एक हजार पर करीब 50 बच्चों में सुनने की समस्या पायी जा सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती अवस्था में समस्या की पहचान होने पर उपचार के जरिए काफी हद तक सुधार संभव है.
बताया सौमिता का उदाहरण
उन्होंने बताया कि इसका उदाहरण दक्षिण 24 परगना के जयनगर की रहने वाली सौमिता प्रमाणिक हैं. परिवार को छह महीने की उम्र में पता चला कि वह सुन नहीं पातीं. उन्हें श्रवण यंत्र लगाया गया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला. बाद में उनका कॉक्लियर प्रत्यारोपण किया गया. आज सौमिता ने अखिल भारतीय नीट परीक्षा में 2191वीं रैंक हासिल की है और एसएसकेएम (पीजी) अस्पताल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं. शुक्रवार को राज्य के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री इंद्रनील खां ने उन्हें सम्मानित किया.
'उज्ज्वल शैशव' नाम से नयी परियोजना शुरू
इसी सोच के साथ 'उज्ज्वल शैशव' नाम से नयी परियोजना शुरू की जा रही है. सीएमआरआई अस्पताल, महावीर सेवा सदन, अन्वेषा और सोसाइटी फॉर द मेनस्ट्रीम इंटीग्रेशन ऑफ द डेफ के संयुक्त प्रयास से यह पहल शुरू होगी. इसके तहत गांव-गांव जाकर नवजात बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच की जायेगी. मंत्री इंद्रनील खां ने बताया कि राज्य सरकार भी इस पहल में सहयोग करेगी.
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बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच जरूरी
परियोजना के सलाहकार, केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व सलाहकार और डॉ बीसी राय इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड एंड फैमिली वेलफेयर के नवजात शिशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि बच्चे के समग्र विकास में सुनने की क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका है. उनके अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क का विकास विभिन्न ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से होता है और सुनने की क्षमता उनमें बेहद महत्वपूर्ण है. इसलिए जन्म के बाद ही बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच कर समस्या की जल्द पहचान और उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है.
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