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गयाजी नगर निमग परिसर में सीसीटीवी कंट्रोल रूम और जेनरेटर के निर्माण को लेकर सोमवार को हंगामा हुआ। मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, डिप्टी मेयर चिंता देवी और सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव सहित कई पार्षदों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निगम की जमीन पर यह निर्माण कार्य बिना बोर्ड की स्वीकृति और सशक्त स्थायी समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित किए बिना शुरू किया गया है, जो नियमों का उल्लंघन है। मेयर गणेश पासवान ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निगम में किसी भी बड़े कार्य के लिए बोर्ड की अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया है। मेयर ने नगर आयुक्त पर मनमाने तरीके से काम कराने का आरोप लगाया। जेनरेटर के कंपन से पुराने भवन को हो सकता नुकसान जनप्रतिनिधियों ने निगम कार्यालय सभागार के पास बड़े जेनरेटर को रखने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि निगम का भवन लगभग 100 पुराना और जर्जर है। भारी जेनरेटर से होने वाले कंपन से भवन को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका है। मौके पर मौजूद ठेकेदार ने बताया कि यह काम नगर आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही शुरू किया गया था। इस पर मेयर ने स्पष्ट किया कि यदि बिना बोर्ड की जानकारी के कार्य कराया जाएगा तो यह जनप्रतिनिधियों की अनदेखी होगी, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले को लेकर मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों ने मगध आयुक्त से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि निगम परिसर में आने-जाने के मुख्य रास्ते पर जेनरेटर रखने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे वाहनों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और सुरक्षा का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर निगम में मेयर सर्वोपरि होते हैं और नगर आयुक्त की भूमिका योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित है। ऐसे में बिना बोर्ड और स्टैंडिंग कमेटी की स्वीकृति के कोई भी कार्य कराना नियमों के विरुद्ध है। फिलहाल इस विवाद के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
