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गिरिडीह के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बनियाडीह, आम बागान और पपरवाटांड़ में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। मेले के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी। इस दौरान ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच विसर्जन यात्रा निकाली गई। मां के जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। प्रतिमा को कंधे पर उठाकर तालाब तक ले जाया गया बनियाडीह में 100 साल से अधिक पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा है। यहां बंगाली रीति-रिवाज से पूजा होती है। प्रतिमा को कंधे पर उठाकर करीब 500 मीटर दूर तालाब तक ले जाया गया। पपरवाटांड़ में 46 साल से मां दुर्गा की पूजा हो रही है। यहां प्रतिमा को वाहन पर लादकर करीब चार किलोमीटर दूर करहरबारी के नावाआहार तालाब में विसर्जित किया गया। इन तीनों जगहों पर भव्य पंडाल और मेले लगे थे, इसलिए प्रतिमाएं दो दिन ज्यादा रखी गई थीं। आम बागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से पिछले तीन वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। यहां भी दुर्गापूजा के अवसर पर भव्य पंडाल और मेले का आयोजन किया गया था। श्रद्धालु प्रतिमा को लगभग एक किलोमीटर दूर सिहोडीह स्थित छठ घाट नदी तक ले गए, जहां विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। मां दुर्गा की खोइछा भराई की रस्म निभाई विसर्जन से पहले महिलाओं ने मां दुर्गा की खोइछा भराई की रस्म निभाई और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की परंपरा पूरी की। इसके बाद मां की प्रतिमा को वाहन पर लादकर विसर्जन यात्रा निकाली गई। तीनों स्थानों पर विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच निकली विसर्जन यात्राओं में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। मां दुर्गा के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हुए मां को विदाई दी। विसर्जन के साथ ही तीनों स्थानों पर आयोजित दुर्गापूजा और मेले का समापन हो गया।
गिरिडीह में कई स्थानों पर प्रतिमा विसर्जन:बनियाडीह, आम बागान और पपरवाटांड़ में बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
