Tuesday, March 31, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

गिरिडीह में देवपहाड़ी मठ गुरुकुल में वैदिक परंपरा जीवंत:93 छात्र ले रहे निःशुल्क शिक्षा, आधुनिक ज्ञान व संस्कारों पर जोर


गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड स्थित प्राचीन देवपहाड़ी मठ इन दिनों वैदिक शिक्षा के केंद्र के रूप में उभरा है। यहां संचालित जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाबा जागनाथ वैदिक गुरुकुलम में वर्तमान में 93 छात्र चारों वेदों की निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही 50 नए बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे छात्रों की संख्या बढ़ने की संभावना है। गुरुकुल के महंत ब्रह्मचारी स्वामी गौरवानंद जी महाराज और आचार्य अमितोश द्विवेदी ने बताया कि इस गुरुकुल की स्थापना लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को वैदिक ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना और सनातन धर्म के प्रति जागरूक बनाना है। उनका कहना है कि यह गुरुकुल आधुनिक शिक्षा के दौर में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित और आगे बढ़ा रहा है। आधुनिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है यहां केवल वेदों की शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि आधुनिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य छात्रों को समय के साथ कदम मिलाकर चलने और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। गुरुकुल में अनुशासन, संस्कार, योग और दैनिक दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास हो सके। गुरुकुल प्रबंधन ने सरकार और समाज के लोगों से अपील की है कि वे यहां आकर शिक्षा व्यवस्था का अवलोकन करें और इस पुनीत कार्य में सहयोग प्रदान करें, ताकि यह परंपरा निरंतर फलती-फूलती रहे। अभिभावकों ने बच्चों के भविष्य को लेकर संतोष व्यक्त किया बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से अपने बच्चों का नामांकन कराने पहुंचे अभिभावकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अभिभावक संजय पांडेय और सोनू पांडेय ने बताया कि उन्हें इस गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और माहौल अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप लगा। उन्होंने महंत और आचार्यों के समर्पण की सराहना करते हुए बच्चों के भविष्य को लेकर संतोष व्यक्त किया। गौरतलब है कि विभिन्न जिलों से आए छात्र मठ परिसर में रहकर गुरु-शिष्य परंपरा के तहत वेद, संस्कार और अनुशासन की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक निर्धारित दिनचर्या के अनुसार अध्ययन, साधना और अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं। इससे न केवल बच्चों में ज्ञान का विकास हो रहा है, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी समझ भी विकसित हो रही है। इस पहल से गिरिडीह सहित आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को नई पहचान मिल रही है और लोग फिर से गुरुकुल परंपरा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

Spread the love

Popular Articles