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गिरिडीह के बेंगाबाद के युवा उद्यमी सुमन कुमार ने इजराइल से फिशरीज और एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है। गांव लौटने के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मत्स्य पालन को सफल बनाया है। सुमन ने आठ तालाबों से मछली पालन शुरू किया था, जो अब बढ़कर 32 तालाब हो गए हैं। वर्तमान में उनके यहां सालाना करीब 100 से 150 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। सुमन ने 2019 से इसकी शुरुआत की और पहले ही साल करीब 45 से 50 टन मछली का उत्पादन मिला। कई प्रजातियों की मछलियां पाली जा रही
इसके बाद उन्होंने इजराइल में सीखी आधुनिक तकनीक को अपने काम में लागू किया। तालाबों का वैज्ञानिक प्रबंधन, अच्छी क्वालिटी के मछली बीज और संतुलित आहार के इस्तेमाल से उत्पादन लगातार बढ़ा। अभी उनके तालाबों में मुख्य रूप से रेहू, कतला और दूसरी प्रजातियों की मछलियां पाली जा रही हैं। सुमन के यहां तैयार होने वाली मछलियां गिरिडीह के अलावा झारखंड के कई जिलों और बिहार की मंडियों तक भेजी जाती हैं। उन्होंने बताया कि रेहू और कतला मछली का थोक भाव करीब 180 से 200 रुपए प्रति किलो मिलता है। 50-60% तक हो रहा मुनाफा
उत्पादन लागत और दूसरे खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा होता है। मत्स्य पालन से उन्हें हर साल करीब 12 से 15 लाख रुपए का शुद्ध लाभ मिल रहा है। सुमन कुमार का मत्स्य पालन व्यवसाय सिर्फ उनकी कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार का माध्यम भी बन रहा है। अभी उनके केंद्र से करीब 30 से 40 लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है। स्थानीय लोग तालाबों की देखरेख, मछलियों को खाना देने, मछली पकड़ने, पैकिंग और लाने-ले जाने जैसे कामों से जुड़े हैं। इससे कई ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है। वहीं, सफलता के बाद भी सुमन कुमार का लक्ष्य यहीं रुकने का नहीं है। आने वाले वर्षों में वे सालाना 500 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार और संबंधित विभाग यदि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और जरूरी संसाधनों को गांव-गांव तक पहुंचाएं, तो झारखंड में मत्स्य पालन किसानों और युवाओं के लिए आय और रोजगार का मजबूत विकल्प बन सकता है।
गिरिडीह में युवक ने मछली पालन से बदली तकदीर:सालाना 15 लाख रुपए की हो रही इनकम, गांव के 40 लोगों को दिया जॉब
