सिखों के पांचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जन देवजी महाराज का शहीदी दिवस गुरुवार को चास गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा, भक्ति और भावनात्मक वातावरण के बीच मनाया गया। इस अवसर पर 16 जून से आरंभ हुए श्री अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता की गई। कार्यक्रम के दौरान लेडीज कीर्तन जत्था, जीजीपीएस स्कूल के बच्चों तथा स्थानीय कीर्तन जत्था ने गुरुवाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। इसके बाद पंजाब से पधारे प्रसिद्ध ढाढी जत्था के भाई शमशेर सिंह एवं उनके साथियों ने गुरु अर्जन देवजी के जीवन, त्याग, तपस्या और अद्वितीय बलिदान पर आधारित वारों का गायन किया। उन्होंने संगत को बताया कि गुरु साहिब ने अत्यंत कठिन यातनाओं को सहते हुए भी प्रभु की रजा को मीठा मानकर स्वीकार किया और मानवता, सत्य तथा धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। ढाढी जत्था ने अपने गायन के माध्यम से सिख इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे संगत ने श्रद्धा एवं भाव-विभोर होकर सुना। कार्यक्रम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक लंगर ग्रहण किया। शहीदी दिवस के अवसर पर गुरुद्वारा साहिब के बाहर संगतों एवं राहगीरों के लिए ठंडे शर्बत और चने के प्रसाद का भी वितरण किया गया। सेवा कार्य में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान गुरुद्वारा परिसर गुरु महिमा, कीर्तन से गुंजायमान रहा।
गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया
सिखों के पांचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जन देवजी महाराज का शहीदी दिवस गुरुवार को चास गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा, भक्ति और भावनात्मक वातावरण के बीच मनाया गया। इस अवसर पर 16 जून से आरंभ हुए श्री अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता की गई। कार्यक्रम के दौरान लेडीज कीर्तन जत्था, जीजीपीएस स्कूल के बच्चों तथा स्थानीय कीर्तन जत्था ने गुरुवाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। इसके बाद पंजाब से पधारे प्रसिद्ध ढाढी जत्था के भाई शमशेर सिंह एवं उनके साथियों ने गुरु अर्जन देवजी के जीवन, त्याग, तपस्या और अद्वितीय बलिदान पर आधारित वारों का गायन किया। उन्होंने संगत को बताया कि गुरु साहिब ने अत्यंत कठिन यातनाओं को सहते हुए भी प्रभु की रजा को मीठा मानकर स्वीकार किया और मानवता, सत्य तथा धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। ढाढी जत्था ने अपने गायन के माध्यम से सिख इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे संगत ने श्रद्धा एवं भाव-विभोर होकर सुना। कार्यक्रम के उपरांत गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक लंगर ग्रहण किया। शहीदी दिवस के अवसर पर गुरुद्वारा साहिब के बाहर संगतों एवं राहगीरों के लिए ठंडे शर्बत और चने के प्रसाद का भी वितरण किया गया। सेवा कार्य में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान गुरुद्वारा परिसर गुरु महिमा, कीर्तन से गुंजायमान रहा।

