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गोड्‌डा-पाकुड़ में सप्तमी पर दुर्गा मंदिरों के कपाट खुले:भक्तों की भीड़ उमड़ी, कलश यात्रा भी निकाली गई; बाजार में भी रही रौनक

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गोड्‌डा-पाकुड़ में सप्तमी पर दुर्गा मंदिरों के कपाट खुले:भक्तों की भीड़ उमड़ी, कलश यात्रा भी निकाली गई; बाजार में भी रही रौनक


गोड्‌डा और पाकुड़ में चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन पाकुड़ जिले के सभी दुर्गा मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। सप्तमी तिथि, बुधवार को सुबह से ही मां दुर्गा के दर्शन के लिए मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाजार में भी काफी रौनक देखी गई, जहां भक्त मां को अर्पित करने के लिए फल, फूल और पूजा सामग्री खरीदते नजर आए। शहर के छोटी अलीगंज स्थित चैती दुर्गा मंदिर में भी हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्री श्री मां बसंती चैती दुर्गा पूजा समिति द्वारा दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया है। सप्तमी तिथि पर मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और अन्य भक्तों ने भाग लिया। पाकुड़-दुमका मुख्य सड़क होते हुए कालीभाषण पहुंची ढोल-बाजे के साथ निकली यह कलश यात्रा मंदिर परिसर से प्रस्थान कर पाकुड़-दुमका मुख्य सड़क होते हुए कालीभाषण पहुंची। कालीभाषण से जल भरकर कलश यात्रा पुनः छोटी अलीगंज लौटी। कलश यात्रा के समापन के बाद पुरोहितों द्वारा मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ की गई। कलश यात्रा को सफल बनाने में अध्यक्ष दिनेश हजरा, सचिव सूरज हाजरा, शकील अंसारी, स्वराज सिंह, आशीष ठाकुर, मोती कुमार, सोनू स्वर्णकार, मोनू स्वर्णकार, पंकज पासवान सहित कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इधर, चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर गोड्डा जिले में मां दुर्गा के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जिले भर में स्थापित भव्य पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। गोड्डा शहर के साथ-साथ पथरगामा चिहारी पीठ मंदिर, बोआरीजोर प्रखंड के लोहंडिया बाजार, श्री पुर और लीलातरी में भी मां की पूजा-अर्चना की गई। इन सभी स्थानों पर माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सप्तमी तिथि के दिन बेलभरणी अर्थात (बेलभद्रानी) का आगमन हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्थानीय सरोवर से कलश में जल भरकर और छर्रा देकर ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक तरीके से मां का डोला मंदिर प्रांगण तक पहुंचाया। इस दौरान बाल विकास समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल और पेय पदार्थ की व्यवस्था की गई थी।

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