गोपालगंज जिले में भीषण गर्मी के बीच मिट्टी के घड़ों और सुराही की मांग में भारी उछाल आया है। लोग अब आधुनिक रेफ्रिजरेटर के बजाय पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक घड़ों के पानी को प्राथमिकता दे रहे हैं। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी गले में खराश, जुकाम और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में फायदेमंद माना जाता है। एसिडिटी और पेट की समस्याओं में राहत मिल सकती है
मिट्टी के घड़े में मौजूद छोटे-छोटे छिद्र पानी के वाष्पीकरण में मदद करते हैं, जिससे पानी प्राकृतिक रूप से शरीर के अनुकूल तापमान तक ठंडा होता है। मिट्टी की क्षारीय प्रकृति पानी के अम्लीय तत्वों को संतुलित करती है, जिससे एसिडिटी और पेट की समस्याओं में राहत मिल सकती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाता है और गले को नुकसान नहीं पहुंचाता। बढ़ती मांग के साथ-साथ निर्माण लागत में वृद्धि के कारण इस वर्ष घड़ों के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। मिट्टी की कमी, ईंधन के बढ़ते दाम और कुम्हारों की कड़ी मेहनत के चलते घड़े पिछले वर्षों की तुलना में महंगे बिक रहे हैं। कीमत 500 से 600 रुपये तक पहुंच गई
पिछले साल तक एक सामान्य घड़ा 300 से 400 रुपये में उपलब्ध था, वहीं इस साल इसकी कीमत 500 से 600 रुपये तक पहुंच गई है। कलात्मक और सुराहीदार घड़ों के दाम इससे भी अधिक हैं। इसके बावजूद, शहर के मौनिया चौक, थाना चौक और ग्रामीण बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। ग्राहकों का कहना है कि फ्रिज के पानी से वह संतुष्टि नहीं मिलती जो मिट्टी के सोंधे पानी से मिलती है। यही कारण है कि इस चिलचिलाती गर्मी में ‘देशी फ्रिज’ घरों की पहली पसंद बन गया है।


