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गोपालगंज में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। गर्मी और बारिश की दस्तक के कारण विषैले जीव अपने बिलों से बाहर निकल रहे हैं, जिससे रोजाना दर्जनों लोग इसका शिकार हो रहे हैं। गोपालगंज सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 30 से अधिक सर्पदंश पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में अकेले सदर अस्पताल में सर्पदंश के ढाई हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और ग्रामीण इलाकों के लोग इन घटनाओं से सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और जिला अस्पताल सहित प्रखंड स्तरीय अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। डॉक्टरों ने जनता के लिए एडवाइजरी की जारी अस्पताल के डॉक्टरों ने बढ़ते मामलों को देखते हुए आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर सांप काटने पर तांत्रिक या ओझा के पास झाड़-फूंक कराने में समय बर्बाद करते हैं। अंधविश्वास के कारण अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी ही मरीज की जान के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती है। सर्पदंश के तुरंत बाद मरीज को बिना घबराए सीधे निकटतम सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए, जहां एंटी-वेनम इंजेक्शन और त्वरित इलाज मिल सके। रात के समय घर से बाहर निकलते वक्त टॉर्च का इस्तेमाल अवश्य करें। झाड़ियों, गीली जगहों और खेत-खलिहानों में काम करते समय पैरों में जूते और लंबे पैंट पहनें। सही समय पर अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने से मरीज की जान 100% बचाई जा सकती है। सतर्कता ही बचाव का सबसे सही उपाय है। तापमान में वृद्धि के कारण सांप निकलते है बाहर विशेषज्ञों के अनुसार, झाड़ियों और बिलों में पानी भरने तथा तापमान में वृद्धि के कारण सांप बाहर निकलने लगते हैं। बारिश के दौरान जमीन के अंदर बिलों में पानी भर जाने से सांप सूखे और ऊंचे स्थानों की तलाश में बाहर आ जाते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और खेतों में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। मानसून के दौरान खेतों में धान की रोपाई, घास की कटाई और सफाई के दौरान इंसानों और सांपों का सामना अधिक होता है। अधिकांश मौतों का कारण सांप का ज़हर नहीं, बल्कि झाड़-फूंक के चक्कर में समय पर अस्पताल न पहुंचना है। जमीन पर न सोने की दी गई सलाह डॉक्टर संतोष कुमार ने बताया कि गर्मी या उमस के दिनों में जमीन पर सोने के बजाय चारपाई का इस्तेमाल करें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। काटे गए हिस्से को हिलाने-डुलाने से बचें ताकि ज़हर शरीर में तेजी से न फैले। डंक वाली जगह पर कसकर पट्टी बांधने, चीरा लगाने या मुंह से ज़हर चूसने जैसी गलतियां बिल्कुल न करें। समय पर मिला सही डॉक्टरी इलाज और एंटी-स्नेक वेनम ही सर्पदंश का एकमात्र प्रामाणिक और जीवनरक्षक समाधान है।
