Monday, June 22, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

छात्र आंदोलन के आगे झुका विवि प्रशासन, पीएचडी नामांकन स्थगित:दो दिन पहले छात्रों ने निकाला था मशाल जुलूस, मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी का है आरोप


बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। छात्रों के तीव्र विरोध और संयुक्त छात्र संगठनों के आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। रविवार को जारी अधिसूचना में 22 जून से शुरू होने वाली पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पर रोक लगाने की घोषणा की गई। विवाद की जड़ पीएचडी प्रवेश परीक्षा की मेधा सूची में कथित गड़बड़ी को बताया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के कई मेधावी छात्र, यहां तक कि अपने-अपने विषयों के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट भी मेधा सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इसे लेकर पिछले कई दिनों से छात्र संगठन आंदोलन कर रहे थे। कुलपति आवास तक निकाला गया था मशाल जुलूस संयुक्त छात्र संगठनों ने मेधा सूची में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर शनिवार को कुलपति आवास तक मशाल जुलूस निकाला था। आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मनमानी और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया। लगातार बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने नामांकन प्रक्रिया स्थगित करने का फैसला लिया। गोल्ड मेडलिस्टों को बाहर करने का है आरोप छात्रों का कहना है कि इतिहास विभाग के टॉपर अभिषेक और भूगोल विभाग के टॉपर अविनाश, जिन्हें पीजी में गोल्ड मेडल मिला था, उनका नाम मेधा सूची में शामिल नहीं है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि लिखित परीक्षा के मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियां हुई हैं। इसे लेकर कई छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग की है। आरक्षण रोस्टर की अनदेखी का भी आरोप आंदोलनकारी छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि मेधा सूची तैयार करने में आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी के कारण कई योग्य अभ्यर्थी अपने अधिकार से वंचित रह गए हैं। छात्र नेता डॉ. चंदन यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि जब तक आरक्षण नियमों का पालन नहीं होगा और मेधावी छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक नामांकन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी। इस आंदोलन में छात्र लोजपा (रा.), छात्र जदयू, एआईएसएफ, एनएसयूआई और बिहार छात्र संघ समेत कई छात्र संगठनों ने भाग लिया। बिना डीन के इंटरव्यू कराने का आरोप नामांकन प्रक्रिया में प्रक्रियागत खामियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि कई विषयों में साक्षात्कार के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार इंटरव्यू बोर्ड में संबंधित संकाय के डीन की उपस्थिति अनिवार्य होती है, लेकिन कई मामलों में बिना डीन के ही साक्षात्कार संपन्न करा लिए गए। छात्रों ने साक्षात्कार में दिए गए अंकों को सार्वजनिक करने की भी मांग की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया। जांच समिति गठित, लंबी खिंच सकती है प्रक्रिया विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और शिकायतों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। फिलहाल प्रशासन का प्रयास स्थिति को नियंत्रित करने का है, लेकिन छात्रों के बीच अब भी असंतोष बना हुआ है। पीएचडी सत्र 2023-24 पहले से ही काफी विलंब का शिकार है। ऐसे में नामांकन प्रक्रिया स्थगित होने से शोधार्थियों को और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। यदि विश्वविद्यालय समय रहते मेधा सूची, आरक्षण रोस्टर और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों का समाधान नहीं करता है तो मामला राजभवन तक पहुंच सकता है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles