जमशेदपुर एग्रिको ट्रिपल मर्डर केस एक ऐसा अनसुलझा सवाल बन गया है जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं। हालांकि पुलिस के सामने तीन ऐसे अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना जरूरी है। एक व्यक्ति, जिसने पूरी जवानी परिवार की खुशहाली के लिए खपा दी, जो बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुनता था। पत्नी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था, आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसने अचानक अपने हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में रवींद्र ही कातिल हैं, लेकिन उनके परिजन और पड़ोसी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल पत्नी की हत्या को लेकर है। यदि किचन में हमला हुआ तो क्या कोई शोर नहीं हुआ? बगल के कमरे में सो रहे बच्चों की नींद क्यों नहीं खुली ? 30 साल की नौकरी में किसी का दिल नहीं दुखाया हत्या के आरोपी रवींद्र सिंह के साथ काम करने वाले लोगों ने कहा कि 30 साल की नौकरी में रवींद्र ने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। ऐसे में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या एक शांत स्वभाव का व्यक्ति रातों-रात इतना हिंसक हो सकता है? आरोपी की दूसरी बेटी और दामाद आज भी यही कह रहे हैं कि पापा (रवींद्र) ऐसा कभी नहीं कर सकते। वारदात के बाद रवींद्र की खुदकुशी की कोशिश की कहानी पर भी संशय के बादल हैं। लोगों का कहना है- यदि कोई तीन हत्याएं करने के बाद जान देने का मन बना चुका था, तो खुद को मामूली चोट पहुंचाने के बजाय ठोस कदम क्यों नहीं उठाया ? थानेदार के बयान पर हत्या का केस दर्ज इस ट्रिपल मर्डर केस में नया मोड़ तब आ गया। जब हत्या के आरोपी रवींद्र सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से उनके बड़े बेटे और बेटी ने हाथ खींच लिए। इसके बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की। सिदगोड़ा थाना प्रभारी मो. फैज अहमद के बयान पर रवींद्र प्रसाद सिंह के खिलाफ पत्नी-बेटे की हत्या और सुप्रिया के गर्भ में पल रहे शिशु की हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोपी को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस की रडार पर रिटायरमेंट का पैसा और मोबाइल सिदगोड़ा थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी बार-बार अवसाद की बात कह रहा है, लेकिन इसका कोई चिकित्सीय प्रमाण नहीं मिला। शक है- आरोपी कुछ छिपा रहा है। जांच का केंद्र अब रवींद्र के रिटायरमेंट के बाद मिली राशि है, जिसे उसने पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में निवेश किया था। पुलिस आरोपी के बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। अब पढ़ें, आरोपी का पूरा बयान सोमवार सुबह करीब पांच बजे क्वार्टर के पिछले हिस्से में रखी दोनों स्कूटी को एसबेस्टस वाले कमरे के अंदर किया। थोड़ी देर बाद अचानक दिमाग फिर गया। हत्या की योजना बनाई। सुबह छह बजे पत्नी सरिता सिंह रसोई में चाय बना रही थी। सबसे पहले सरिता के सिर पर पीछे से कुल्हाड़ी से वार किया। वह जमीन पर गिर गई। इसके बाद उसपर दो-तीन वार किए। फिर बेटे रविकेश के कमरे में गया। वहां सोते हुए रविकेश के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया। बेटे पर हमला करते वक्त कुल्हाड़ी की बेंत बीच से टूट गई। फिर हथौड़े से बेटी सुप्रिया पर दो-तीन बार किया। पत्नी के शव को देखकर पछतावा हुआ तो आत्महत्या का प्रयास किया।
जमशेदपुर में ट्रिपल मर्डर; थानेदार के बयान पर केस दर्ज:पत्नी की हत्या, बच्चों की नींद और आत्महत्या की कोशिश पर उठ रहे सवाल
जमशेदपुर एग्रिको ट्रिपल मर्डर केस एक ऐसा अनसुलझा सवाल बन गया है जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं। हालांकि पुलिस के सामने तीन ऐसे अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना जरूरी है। एक व्यक्ति, जिसने पूरी जवानी परिवार की खुशहाली के लिए खपा दी, जो बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुनता था। पत्नी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था, आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसने अचानक अपने हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में रवींद्र ही कातिल हैं, लेकिन उनके परिजन और पड़ोसी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल पत्नी की हत्या को लेकर है। यदि किचन में हमला हुआ तो क्या कोई शोर नहीं हुआ? बगल के कमरे में सो रहे बच्चों की नींद क्यों नहीं खुली ? 30 साल की नौकरी में किसी का दिल नहीं दुखाया हत्या के आरोपी रवींद्र सिंह के साथ काम करने वाले लोगों ने कहा कि 30 साल की नौकरी में रवींद्र ने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। ऐसे में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या एक शांत स्वभाव का व्यक्ति रातों-रात इतना हिंसक हो सकता है? आरोपी की दूसरी बेटी और दामाद आज भी यही कह रहे हैं कि पापा (रवींद्र) ऐसा कभी नहीं कर सकते। वारदात के बाद रवींद्र की खुदकुशी की कोशिश की कहानी पर भी संशय के बादल हैं। लोगों का कहना है- यदि कोई तीन हत्याएं करने के बाद जान देने का मन बना चुका था, तो खुद को मामूली चोट पहुंचाने के बजाय ठोस कदम क्यों नहीं उठाया ? थानेदार के बयान पर हत्या का केस दर्ज इस ट्रिपल मर्डर केस में नया मोड़ तब आ गया। जब हत्या के आरोपी रवींद्र सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से उनके बड़े बेटे और बेटी ने हाथ खींच लिए। इसके बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की। सिदगोड़ा थाना प्रभारी मो. फैज अहमद के बयान पर रवींद्र प्रसाद सिंह के खिलाफ पत्नी-बेटे की हत्या और सुप्रिया के गर्भ में पल रहे शिशु की हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोपी को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस की रडार पर रिटायरमेंट का पैसा और मोबाइल सिदगोड़ा थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी बार-बार अवसाद की बात कह रहा है, लेकिन इसका कोई चिकित्सीय प्रमाण नहीं मिला। शक है- आरोपी कुछ छिपा रहा है। जांच का केंद्र अब रवींद्र के रिटायरमेंट के बाद मिली राशि है, जिसे उसने पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में निवेश किया था। पुलिस आरोपी के बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। अब पढ़ें, आरोपी का पूरा बयान सोमवार सुबह करीब पांच बजे क्वार्टर के पिछले हिस्से में रखी दोनों स्कूटी को एसबेस्टस वाले कमरे के अंदर किया। थोड़ी देर बाद अचानक दिमाग फिर गया। हत्या की योजना बनाई। सुबह छह बजे पत्नी सरिता सिंह रसोई में चाय बना रही थी। सबसे पहले सरिता के सिर पर पीछे से कुल्हाड़ी से वार किया। वह जमीन पर गिर गई। इसके बाद उसपर दो-तीन वार किए। फिर बेटे रविकेश के कमरे में गया। वहां सोते हुए रविकेश के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया। बेटे पर हमला करते वक्त कुल्हाड़ी की बेंत बीच से टूट गई। फिर हथौड़े से बेटी सुप्रिया पर दो-तीन बार किया। पत्नी के शव को देखकर पछतावा हुआ तो आत्महत्या का प्रयास किया।


