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जमुई जिले के खैरा प्रखंड के धर्मपुर महादलित टोले की उर्मिला कुमारी ने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर एएनएम बनकर अपने समाज में नई पहचान बनाई है। वह अपने इलाके की पहली लड़की हैं, जिसने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होंने इंटर की पढ़ाई पूरी की और नर्सिंग कर एएनएम बन गईं। फिलहाल वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं। उर्मिला का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता। बचपन में ही उनके पिता जगदीश मांझी का निधन हो गया, जबकि मां मानसिक रूप से बीमार हो गईं। इसके बाद वह अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई और मजदूरी दोनों करती रहीं। पैसों के हिसाब ने बदली जिंदगी
उर्मिला बताती हैं कि उनके समाज के अधिकांश बच्चे बचपन से ही मजदूरी करने लगते हैं। कोई ईंट-भट्टों पर काम करता है, कोई जंगल से लकड़ी लाता है तो कोई खेतों में मजदूरी करता है।वह खुद भी बचपन में ऐसे ही काम करती थीं। मजदूरी के दौरान मिलने वाले पैसों का सही हिसाब तक नहीं समझ पाने से उन्हें एहसास हुआ कि शिक्षा बेहद जरूरी है। तभी उन्होंने ठान लिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं,पढ़ाई जरूर करेंगी। शादी के बाद भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी
पढ़ाई पूरी करने के बाद उर्मिला अब एएनएम के रूप में स्वास्थ्य सेवा दे रही हैं। साथ ही अपने गांव और आसपास के महादलित टोले में बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती हैं और उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करती हैं। उर्मिला का लक्ष्य आगे जीएनएम की पढ़ाई करना है। उनका कहना है कि शादी के बाद भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी।
जमुई में महादलित टोले की उर्मिला बनीं एएनएम:इलाके की पहली मैट्रिक पास लड़की, मजदूरी कर पूरी की पढ़ाई, अब बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहीं
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