जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत चेरकपानी गांव के प्रधान टोला में पेयजल संकट गहरा गया है। यहां करीब 150 आदिवासी आबादी के लोग दूषित डोभा और चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं। यहां सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना भी काफी धीमी है। इस योजना के तहत नारायणपुर प्रखंड के 25 पंचायतों के 262 गांवों के लगभग 25 हजार परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। चार में तीन चापाकल खराब चेरकपानी के प्रधान टोला में विभाग द्वारा लगाए गए चार चापाकलों में से तीन खराब पड़े हैं। एकमात्र चालू चापाकल नदी के पास स्थित है, जिससे पर्याप्त पानी नहीं निकल पाता। इस कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए खेत पार कर तालाब किनारे बने डोभा और चुआं से पानी लाना पड़ता है। महिलाएं गैलन, बाल्टी और हांड़िया में पानी भरकर घर तक पहुंचाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। महिलाएं तालाब से निकाल रहीं पानी ग्राम प्रधान नरेश हांसदा के अनुसार, टोला में पेयजल की स्थिति बेहद खराब है। वहीं सावित्री हांसदा, ललित टुडू और पार्वती टुडू ने बताया कि चापाकल खराब रहने के कारण महिलाएं तालाब में दाढ़ी बनाकर पानी निकालती हैं और उसी का उपयोग करती हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल चेरकपानी तक सीमित नहीं है। इससे पहले चंपापुर पंचायत के बेडवा टोला और सहरपुरा वन पंचायत के पीलवारी गांव में भी पेयजल संकट की गंभीर स्थिति सामने आ चुकी है। 2028 तक बढ़ी योजना की समय-सीमा विभागीय जानकारी के अनुसार, 263 करोड़ की लागत से शुरू हुई हर घर नल-जल योजना को अब मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जल जीवन मिशन-2 के तहत नारायणपुर प्रखंड में कुल 16 जलमीनार के माध्यम से जलापूर्ति बहाल की जानी है। पीएचडी विभाग के एसडीओ अशोक पासवान ने बताया कि टंकी निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और पाइप बिछाने का काम जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चेरकपानी में खराब पड़े चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। बावजूद इसके, भीषण गर्मी में ग्रामीणों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही है।
जामताड़ा के चेरकपानी में गहराया पेयजल संकट:नल-जल योजना भी नहीं हुआ पूरा, खेत का पानी पी रहे लोग, 150 आबादी प्रभावित
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत चेरकपानी गांव के प्रधान टोला में पेयजल संकट गहरा गया है। यहां करीब 150 आदिवासी आबादी के लोग दूषित डोभा और चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं। यहां सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना भी काफी धीमी है। इस योजना के तहत नारायणपुर प्रखंड के 25 पंचायतों के 262 गांवों के लगभग 25 हजार परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। चार में तीन चापाकल खराब चेरकपानी के प्रधान टोला में विभाग द्वारा लगाए गए चार चापाकलों में से तीन खराब पड़े हैं। एकमात्र चालू चापाकल नदी के पास स्थित है, जिससे पर्याप्त पानी नहीं निकल पाता। इस कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए खेत पार कर तालाब किनारे बने डोभा और चुआं से पानी लाना पड़ता है। महिलाएं गैलन, बाल्टी और हांड़िया में पानी भरकर घर तक पहुंचाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। महिलाएं तालाब से निकाल रहीं पानी ग्राम प्रधान नरेश हांसदा के अनुसार, टोला में पेयजल की स्थिति बेहद खराब है। वहीं सावित्री हांसदा, ललित टुडू और पार्वती टुडू ने बताया कि चापाकल खराब रहने के कारण महिलाएं तालाब में दाढ़ी बनाकर पानी निकालती हैं और उसी का उपयोग करती हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल चेरकपानी तक सीमित नहीं है। इससे पहले चंपापुर पंचायत के बेडवा टोला और सहरपुरा वन पंचायत के पीलवारी गांव में भी पेयजल संकट की गंभीर स्थिति सामने आ चुकी है। 2028 तक बढ़ी योजना की समय-सीमा विभागीय जानकारी के अनुसार, 263 करोड़ की लागत से शुरू हुई हर घर नल-जल योजना को अब मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जल जीवन मिशन-2 के तहत नारायणपुर प्रखंड में कुल 16 जलमीनार के माध्यम से जलापूर्ति बहाल की जानी है। पीएचडी विभाग के एसडीओ अशोक पासवान ने बताया कि टंकी निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और पाइप बिछाने का काम जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चेरकपानी में खराब पड़े चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। बावजूद इसके, भीषण गर्मी में ग्रामीणों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही है।


