Saturday, July 18, 2026

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जामताड़ा में विपत्तारिणी व्रत पर मंदिरों में उमड़ी भीड़:महिलाओं ने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की


जामताड़ा जिले में शनिवार को विपत्तारिणी व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर, काली मंदिर और हरि मंदिर सहित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों में सुहागिन महिलाओं समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। महिलाओं ने विधि-विधान से माता विपत्तारिणी की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, संतान के उत्तम स्वास्थ्य, परिवार की सुख-समृद्धि और सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा की कामना की। जिले के सभी छह प्रखंडों में व्रत और पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो दिनभर जारी रहा। जिले के प्रसिद्ध मां चंचला मंदिर में सुबह करीब छह बजे से ही भीड़ जुटने लगी। दिनभर में लगभग दो हजार महिलाओं ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। जिले के विभिन्न गांवों और शहरी क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मां चंचला को जिले की कुलदेवी मानते हुए श्रद्धाभाव से पूजा की और सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। उन्होंने श्रद्धालुओं को विपत्तारिणी व्रत कथा का श्रवण भी कराया। कथा के उपरांत महिलाओं ने अपने परिवार की खुशहाली, पति की लंबी आयु, संतान की रक्षा और जीवन के संकटों को दूर करने की प्रार्थना की। पूजा के दौरान फल, फूल, चुनरी, नारियल और सिंदूर जैसी पूजन सामग्री अर्पित की गईं, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां विपत्तारिणी (बिपद-तारिणी) देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं। यह व्रत मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में रथ यात्रा के दौरान पड़ने वाले मंगलवार और शनिवार को रखा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता विपत्तारिणी की आराधना से जीवन के संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।

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