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दीपावली और छठ महापर्व पर अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे झारखंड और बिहार के प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से कोडरमा, पारसनाथ, धनबाद, बोकारो और रांची आने वाली प्रमुख ट्रेनों में सीटों का संकट गहरा गया है। सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से लेकर राजधानी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों तक में कई श्रेणियों में ‘नो रूम’ की स्थिति बन गई है। लंबी वेटिंग लिस्ट के बाद यात्रियों के लिए कन्फर्म टिकट हासिल करना बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड पर कोडरमा, हजारीबाग रोड, पारसनाथ, गोमो और धनबाद जैसे स्टेशनों से बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। इन स्टेशनों के जरिए हजारीबाग, बरही, गिरिडीह, बरकाकाना और बिहार के नवादा समेत आसपास के इलाकों के लोग अपने घर पहुंचते हैं। त्योहारों के दौरान महानगरों में काम करने वाले श्रमिकों, निजी कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों और अन्य प्रवासियों की आवाजाही बढ़ने से आरक्षण पर दबाव बढ़ गया है। मुंबई मेल से नीलांचल तक सीटों का संकट प्रमुख ट्रेनों की आरक्षण स्थिति यात्रियों की परेशानी बयां कर रही है। 12322 मुंबई-हावड़ा मेल के स्लीपर, थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी में ‘नो रूम’ की स्थिति बताई गई है। वहीं, 18610 लोकमान्य तिलक-रांची एक्सप्रेस के स्लीपर और थर्ड एसी में 160 से अधिक वेटिंग होने की जानकारी है, जबकि सेकेंड और फर्स्ट एसी में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। 12876 आनंद विहार-पुरी नीलांचल एक्सप्रेस के स्लीपर में वेटिंग 200 के पार पहुंचने और वातानुकूलित श्रेणियों में बुकिंग बंद होने से यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा 20840 नई दिल्ली-रांची राजधानी, 12314 सियालदह राजधानी और 12260 सियालदह दुरंतो जैसी ट्रेनों में भी आरक्षण की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। पुरुषोत्तम, पूर्वा और नेताजी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में भी सीटों की उपलब्धता सीमित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, आरक्षण की स्थिति यात्रा की तारीख और श्रेणी के अनुसार बदल सकती है। घर पहुंचने की चिंता, वापसी में भी परेशानी त्योहारी सीजन में यात्रियों की भीड़ बढ़ने से केवल घर आने ही नहीं, बल्कि पर्व के बाद वापस लौटने के लिए भी टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है। नौकरी और कारोबार के सिलसिले में महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए त्योहार पर परिवार के साथ समय बिताना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने से उनकी यात्रा योजना प्रभावित हो रही है। विशेषकर उन यात्रियों की परेशानी ज्यादा है, जिन्हें निर्धारित तारीख पर घर पहुंचना जरूरी है। रेलवे की ओर से हर साल दीपावली और छठ के दौरान पूजा स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाता है, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या के मुकाबले इनकी उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने की शिकायत सामने आती है। नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने को लेकर भी यात्रियों की नजर रेलवे के फैसले पर है। तत्काल कोटे में टिकट मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन सीमित सीटों और अधिक मांग के कारण इस विकल्प पर भी निर्भर रहना आसान नहीं है। अतिरिक्त ट्रेनों और कोच की मांग सीटों की कमी के बीच यात्रियों की मांग है कि रेलवे दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों से झारखंड-बिहार आने वाले प्रमुख रेलखंडों पर अतिरिक्त पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाए। साथ ही, यात्रियों की संख्या और उपलब्धता को देखते हुए नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को कन्फर्म टिकट मिल सके। धनबाद और रांची रेल मंडल से खुलने या गुजरने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त बोगियां जोड़ने को लेकर ठोस घोषणा नहीं होने की बात भी यात्रियों की चिंता बढ़ा रही है। तत्काल टिकट और पूजा स्पेशल ट्रेनें फिलहाल प्रमुख विकल्प माने जा रहे हैं। हालांकि, यात्रियों को राहत देने के लिए कितनी अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएंगी और किन ट्रेनों में कोच बढ़ाए जाएंगे, इस पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। समय रहते व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई तो त्योहार के दौरान घर लौटने वाले प्रवासियों को लंबी प्रतीक्षा और भीड़ के बीच सफर करने की मजबूरी का सामना करना पड़ सकता है।
झारखंड में दिवाली-छठ पर ट्रेनों में ‘नो रूम’:कोडरमा रूट पर सीटों का संकट, दिल्ली-मुंबई से घर लौटने वालों की बढ़ी मुश्किलें
