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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि 2024 में राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि कई मामलों में शिकायत थाने तक नहीं पहुंच रही है। देश के कई राज्यों में बुजुर्गों से धोखाधड़ी, संपत्ति विवाद और मारपीट के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन झारखंड में आंकड़ा शून्य है। वहीं कानून का उल्लंघन करने के आरोप में राज्य में 143 किशोर पकड़े गए। इनमें 32 किशोर पॉक्सो एक्ट के मामलों में शामिल थे। वहीं 10 किशोर हत्या और 78 चोरी व संपत्ति से जुड़े अपराधों में पकड़े गए। संपत्ति से जुड़े अपराधों में भी 44 किशोरों की संलिप्तता सामने आई, जिनमें चोरी का सामान रखने और खरीद-फरोख्त के मामले भी शामिल हैं। इस दौरान रेलवे परिसरों और ट्रेनों में अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में आरपीएफ ने 266 केस दर्ज कर 515 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 355 के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हुई। इसके बावजूद कोर्ट में सिर्फ 20 मामलों में 28 लोगों को ही दोषी ठहराया जा सका। यानी बड़ी संख्या में आरोपी सबूतों की कमी या कमजोर पैरवी के कारण सजा से बच गए। 46 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां, 1600 से अधिक महिलाएं भी हत्या, लूट और चोरी जैसे मामलों में झारखंड पुलिस ने वर्ष 2024 में 32,788 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 31,591 पुरुष और 1,197 महिलाएं शामिल थीं। वहीं आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस, पॉक्सो और साइबर कानूनों के तहत 14,168 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इनमें 13,707 पुरुष और 461 महिलाएं शामिल हैं। राज्य में आर्थिक अपराधों के मामलों में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हुआ। 2024 में धोखाधड़ी और संपत्ति नुकसान के 2619 मामले दर्ज किए गए। इनमें 1954 मामलों में पीड़ितों को एक लाख रुपए से कम का नुकसान हुआ। वहीं 645 मामलों में एक लाख से 10 लाख रुपए तक की ठगी हुई। 50 लाख रुपए से अधिक की ठगी का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक साइबर और वित्तीय जालसाज छोटे-छोटे अमाउंट के जरिए आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।
