Thursday, September 3, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

झारखंड में रोजगार के इंतजार में 3.98 लाख रजिस्टर्ड बेरोजगार:2 साल में दिए सिर्फ 18,990 रोजगार, नौकरी-भत्ता नहीं, बेरोजगारी नंबर मिला


झारखंड के 43 नियोजनालयों में रजिस्टर्ड 3,97,960 बेरोजगार युवाओं में से पिछले 2 वर्षों में महज 18,990 को ही रोजगार मिल सका है। सितंबर 2024 से अगस्त 2026 तक नियोजनालयों की ओर से आयोजित रोजगार मेलों और भर्ती कैंपों के जरिए इतनी ही संख्या में युवाओं को नौकरी मिली। यह कुल निबंधित बेरोजगारों का महज 4.55 प्रतिशत है। यानी नियोजनालय में निबंधन कराने वाले 95 प्रतिशत से अधिक युवा अब भी रोजगार की तलाश में हैं। इन आंकड़ों से नियोजनालयों के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। निबंधित बेरोजगारों में अकुशल और आठवीं तक पढ़े युवाओं से लेकर स्नातक, डिप्लोमा और पीएचडी की डिग्री रखने वाले युवा तक शामिल हैं। निबंधन के बाद रोजगार की उम्मीद, लेकिन इंतजार जारी नियोजनालय में रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद बनी रहती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवाओं का इंतजार लंबा हो रहा है। पिछले दो वर्षों में राज्यभर में 18,990 युवाओं को रोजगार मिलने के बावजूद 3,97,960 निबंधित बेरोजगारों में से अधिकांश अभी भी नौकरी की तलाश में हैं। अकेला धनबाद ऐसा जिला है जहां 35,376 निबंधित बेरोजगारों के बीच रोजगार का इंतजार जारी है। ऐसे में युवाओं के लिए सिर्फ नियोजनालय में निबंधन कराना पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। बेरोजगार युवाओं के बीच रोजगार के साथ बेरोजगारी भत्ता, कौशल प्रशिक्षण और टूल किट जैसी योजनाओं की मांग भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि नियोजनालय में निबंधित युवाओं में 95 प्रतिशत से अधिक को फिलहाल रोजगार के बजाय सिर्फ निबंधन संख्या के सहारे इंतजार करना पड़ रहा है। बिहार में 1000 रुपए, तो छत्तीसगढ़ में ₹2500 भत्ता बिहार में मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत 20 से 25 वर्ष तक के 12वीं पास युवाओं को अधिकतम 2 वर्ष तक 1 हजार रुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जाता है। शर्त यह है कि वे उच्च शिक्षा में नामांकित न हों। वहीं छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत 18-35 वर्ष के 12वीं पास बेरोजगारों को 2.5 हजार रुपए मिलते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में युवश्री प्रकल्प योजना के तहत 18-45 वर्ष के बेरोजगारों को 1500 रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान है। पड़ोसी राज्यों में बेरोजगारी भत्ता और प्रशिक्षण योजनाएं बेरोजगार युवाओं को राहत देने के मामले में पड़ोसी राज्यों की योजनाओं का भी उदाहरण सामने आता है। बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बेरोजगार युवाओं को एक निश्चित अवधि तक मासिक भत्ता दिए जाने की व्यवस्था है। वहीं मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण तथा टूल किट जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के साथ उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसके मुकाबले झारखंड में चुनाव के दौरान बेरोजगारी भत्ता शुरू करने की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक न तो बेरोजगारी भत्ता शुरू हुआ है और न ही प्रशिक्षण या टूल किट की ऐसी व्यवस्था लागू हो सकी है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles