झारखंड के कोडरमा समेत विभिन्न जिलों में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और अगले चार-पांच दिनों तक इसके जारी रहने की संभावना किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है। इस बारिश से एक ओर जहां तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर यह किसानों के लिए फायदेमंद भी साबित हो रही है। कोडरमा के जयनगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार आगामी दिनों में होने वाली लगातार बारिश से किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बारिश से खेतों में नमी आएगी, जिससे फिलहाल लगी सब्जियों को फायदा होगा और उनके विकास में मदद मिलेगी, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा। किसानों को सिंचाई के इस कार्य से राहत
डॉ. अजय कुमार राय ने यह भी बताया कि अप्रैल माह की शुरुआत में पड़ी भीषण गर्मी के कारण सब्जी उत्पादक और बागवानी करने वाले किसानों को प्रतिदिन सिंचाई करनी पड़ती थी। लेकिन, पिछले दो दिनों से हुई बारिश ने किसानों को सिंचाई के इस कार्य से राहत दी है। इसके अतिरिक्त, इस बारिश से आम के फलों को भी अच्छा फायदा होगा और आम की अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि हुई है, वहां आम की फसल को थोड़ा नुकसान भी पहुंचा है। बारिश से जमीन में नमी बनी रहेगी
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में लगातार होने वाली बारिश से जमीन में नमी बनी रहेगी, जो अगले एक-दो महीने बाद तैयार होने वाली फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। डॉ. राय ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस बारिश का अधिकतम लाभ उठाएं। बारिश से होने वाले नमी से किसान खेतों में थोड़ी गहरी जुताई कर उसे फिलहाल छोड़ दें, ताकि मिट्टी के अंदर छुपे वैसे कीड़े जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हैं, वो धूप पड़ने पर नष्ट हो जाएंगे, जिससे खेतों में लगने वाली फसल का अच्छा पैदावार हो सकेगा। ढैंचा की खेती कर ले सकते हैं फायदा
वहीं, कृषि वैज्ञानिक अजय रॉय ने बताया कि किसान अपने खेतों में हरी खाद तैयार कर सकते हैं। इसके लिए किसान अभी अपने खेतों में ढैंचा की बुआई कर सकते हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश इसके लिए लाभकारी होगी और 1 से डेढ़ महीने में ढैंचा से हरी खाद तैयार हो जाएगी, जो अगले 2 महीनों में खेतों में लगने वाली फसलों के लिए काफी लाभकारी होगी। क्या होता है ढैंचा ढैंचा की खेती मुख्य रूप से हरी खाद के रूप में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए की जाती है। यह एक तेज़ी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जिसे 40-45 दिनों में खेत में ही जोतकर सड़ा दिया जाता है, जिससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन और कार्बनिक तत्व मिलते हैं और यूरिया की बचत होती है। ढैंचा खेती की मुख्य बातें और लाभ
मिट्टी में सुधार: यह मिट्टी में कार्बनिक तत्वों और जीवांश की मात्रा बढ़ाकर उपजाऊ क्षमता में सुधार करता है।
यूरिया की बचत: ढैंचा हरी खाद से मिट्टी में 80-100 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ जाती है, जिससे यूरिया की जरूरत लगभग 30% तक कम हो जाती है।
खरपतवार नियंत्रण: इसकी घनी वृद्धि के कारण यह अन्य खरपतवारों को उगने से रोकता है।
क्षारीय/लवणीय मिट्टी का सुधार: यह लवणीय और क्षारीय मिट्टी को उपजाऊ बनाने में अत्यधिक मददगार है।
समय और बुवाई: गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल से जुलाई के बीच इसकी बुवाई की जाती है। बुवाई के 40-45 दिन बाद, फूल आने से पहले इसे खेत में जोत देना चाहिए।

