राज्य के नवनियुक्त चारों सूचना आयुक्तों ने आज लोक भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सभी नव चयनीत आयुक्तों को लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई। इसी के साथ करीब पांच साल बाद झारखंड राज्य सूचना आयोग पूरी तरह कार्यशील (फंक्शनल) हो जाएगा। राज्य सरकार ने 10 जून को राज्यपाल की सशर्त स्वीकृति के बाद वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के पूर्व प्रवक्ता तनुज खत्री, भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव अमूल नीरज खलखो को सूचना आयुक्त नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी। लोकभवन ने दो बार लौटा दी थी फाइल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में इन नामों पर फैसला हुआ था। फाइल लोकभवन भेजी गई। लेकिन राज्यपाल ने एक अप्रैल को फाइल सरकार को लौटा दी। इसपर कुछ उम्मीदवारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि, उनकी निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने सरकार से पूछा था कि सूचना आयोग जैसी अर्ध न्यायिक संस्था में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की योग्यता और स्वतंत्रता का किस तरह परीक्षण किया गया। इसका जवाब देते हुए सरकार ने कहा था कि चयन समिति ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई है। जिन नामों की अनुशंसा की गई है, वे विधिसम्मत हैं। लेकिन लोकभवन ने फिर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए फाइल दूसरी बार भी लौटा दी। सरकार ने फिर तीसरी बाद उन्हीं नामों की फाइल भेजी, जिसे अंततः मंजूरी दे दी गई। छह साल से खाली था सूचना आयुक्त का पद मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल नवंबर 2019 में खत्म हो गया था। इसके बाद आयोग में बचे एकमात्र सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त का दायित्व सौंपा गया था। 8 मई 2020 को उनका कार्यकाल भी खत्म हो गया। इसके बाद से सूचना आयुक्त का पद खाली पड़ा था। सूचना आयुक्त के लिए आए थे 300 आवेदन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद सूचना आयुक्तों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हुई थी। मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 35 से अधिक आवेदन आए थे। सूचना आयुक्त के लिए करीब 300 आवेदन चयन समिति के समक्ष रखे गए थे। लेकिन अबतक मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति नहीं हुई है।
झारखंड लोकभवन में नए सूचना आयुक्तों ने ली शपथ:5 साल बाद सक्रिय हुआ आयोग, राज्यपाल संतोष गंगवार ने दिलाई शपथ
राज्य के नवनियुक्त चारों सूचना आयुक्तों ने आज लोक भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सभी नव चयनीत आयुक्तों को लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई। इसी के साथ करीब पांच साल बाद झारखंड राज्य सूचना आयोग पूरी तरह कार्यशील (फंक्शनल) हो जाएगा। राज्य सरकार ने 10 जून को राज्यपाल की सशर्त स्वीकृति के बाद वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के पूर्व प्रवक्ता तनुज खत्री, भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव अमूल नीरज खलखो को सूचना आयुक्त नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी। लोकभवन ने दो बार लौटा दी थी फाइल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में इन नामों पर फैसला हुआ था। फाइल लोकभवन भेजी गई। लेकिन राज्यपाल ने एक अप्रैल को फाइल सरकार को लौटा दी। इसपर कुछ उम्मीदवारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि, उनकी निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने सरकार से पूछा था कि सूचना आयोग जैसी अर्ध न्यायिक संस्था में नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों की योग्यता और स्वतंत्रता का किस तरह परीक्षण किया गया। इसका जवाब देते हुए सरकार ने कहा था कि चयन समिति ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई है। जिन नामों की अनुशंसा की गई है, वे विधिसम्मत हैं। लेकिन लोकभवन ने फिर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए फाइल दूसरी बार भी लौटा दी। सरकार ने फिर तीसरी बाद उन्हीं नामों की फाइल भेजी, जिसे अंततः मंजूरी दे दी गई। छह साल से खाली था सूचना आयुक्त का पद मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल नवंबर 2019 में खत्म हो गया था। इसके बाद आयोग में बचे एकमात्र सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त का दायित्व सौंपा गया था। 8 मई 2020 को उनका कार्यकाल भी खत्म हो गया। इसके बाद से सूचना आयुक्त का पद खाली पड़ा था। सूचना आयुक्त के लिए आए थे 300 आवेदन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद सूचना आयुक्तों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हुई थी। मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 35 से अधिक आवेदन आए थे। सूचना आयुक्त के लिए करीब 300 आवेदन चयन समिति के समक्ष रखे गए थे। लेकिन अबतक मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति नहीं हुई है।

