![]()
झारखंड आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा- 2015 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के दस साल बाद न्याय की उम्मीद जगी है। क्योंकि, झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी की ओर से आयोजित सिपाही बहाली परीक्षा 2015 में शारीरिक, मेडिकल और लिखित परीक्षा पास करने के बाद भी चयन नहीं किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद जेएसएससी से 6 सप्ताह में जवाब दाखिल करने निर्देश दिया है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने अदालत को बताया कि जेएसएससी ने झारखंड आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा-2015 आयोजित की थी। इसका परिणाम 17 दिसंबर 2016 को जारी किया गया था। कुल 7272 पदों के लिए नियुक्ति हुई थी। परीक्षा होने के बाद आयोग ने नियुक्ति के लिए 4932 अभ्यर्थियों की अनुशंसा की थी, जबकि राज्य सरकार ने 4892 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया था। अभ्यर्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि इस परीक्षा से संबंधित एक अन्य मामले में जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को 862 याचिकाकर्ताओं को नियुक्त करने का आदेश दिया था। बताया गया कि प्रार्थियों ने भी निर्धारित शारीरिक, मेडिकल और लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बावजूद उनका चयन नहीं किया गया। जबकि, सिपाही बहाली के 1,518 पद अब भी रिक्त हैं। ऐसे में प्रार्थियों ने रिक्त पदों पर नियुक्त करने की अनुमति मांगी। अदालत ने दलील सुनने के बाद जेएसएससी को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की है। सुप्रीम कोर्ट ने जितेन्द्र कुमार शर्मा व अन्य की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए 21 अगस्त को 862 याचिकाकर्ताओं को नियुक्त करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षार्थियों के पक्ष में फैसला देने के तीन आधार बताएं थे। अदालत ने माना कि अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में पूरी की। क्योंकि, याचिकाकर्ताओं ने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, शारीरिक और मेडिकल जांच पास की थी। उनके दस्तावेजों का सत्यापन भी सही पाया गया था। इसके बावजूद उनका नाम चयन सूची में नहीं आया था। इसके साथ ही अदालत ने माना कि राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 27 मई 2026 तक कुल 2,380 सिपाही के पद रिक्त थे। इनमें 1,168 पद महिलाओं के लिए निर्धारित थे, जबकि 1,212 पदों पर महिला या पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा सकती थी। इसी के आधार पर शीर्ष न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी थी।
झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी से मांगा जवाब:सिपाही बहाली परीक्षा में सफल होने के 10 साल बाद जगी न्याय की उम्मीद
