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केंद्र ने अप्रैल 2024 के बाद पैसे देना बंद कर दिया था झारखंड में हर घर नल-जल योजना फिर पटरी पर लौटने वाली है। करीब दो साल से केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है। झारखंड सरकार के बार-बार अनुरोध के बाद केंद्र सरकार ने अपने रुख में ढील देते हुए 2000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। लेकिन शर्त रखी है कि राज्य सरकार पहले अपने हिस्से की राशि खर्च करे, उसके बाद ही केंद्र से पैसे मिलेंगे। अब राज्य सरकार भी अपने हिस्से का 2000 करोड़ रुपए देगी। यानी अब 4000 करोड़ रुपए से इस योजना को गति मिलेगी। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2024 के बाद इस योजना में पैसे देना बंद कर दिया था। पिछले साल केंद्र ने स्पष्ट कर दिया था कि अब बचे काम के लिए केंद्र सरकार पैसे नहीं देगी। राज्य को अपने संसाधनों से बचे हुए काम को पूरा करना होगा। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार में टकराव की स्थिति बन गई। कई बार विभाग ने और पेयजल मंत्री ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा। पेयजल मंत्री ने कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर पैसे आवंटित करने का आग्रह किया। हालत ऐसी बनी कि राज्य को अपने हिस्से की राशि खर्च करने और ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगनी पड़ी। पिछले वित्तीय वर्ष में वित्त विभाग ने करीब 500 करोड़ रुपए आवंटित किया, जिससे कुछ ठेकेदारों का भुगतान किया गया। झारखंड में अब तक सिर्फ 55.43 फीसदी काम हुआ झारखंड में इस योजना के तहत कुल 62,52,346 लाख घर चिह्नित किए गए हैं। इनमें से अब तक 34,65,959 घरों तक ही नल से पानी पहुंचाया जा सका है। यानी सिर्फ 55.43% काम हुआ है। बाकी में या तो काम ही शुरू नहीं हुआ है या फिर अधूरा पड़ा है। कहीं पानी की टंकी तैयार हुई तो पाइपलाइन नहीं बिछी, कहीं पाइपलाइन बिछ गई लेकिन उसमें पानी नहीं आया। दरअसल ठेकेदारों को 2024 से भुगतान ही नहीं हुआ, जिसके कारण यह योजना बीच में ही अटक गई थी। मार्च 2024 से अप्रैल 2026 तक केंद्र की हिस्सेदारी राशि 6000 करोड़ और राज्य की 7000 करोड़ है। ठेकेदारों के फंसे हैं 6000 करोड़ रुपए ठेकेदारों के मल्टी विलेज स्कीम में करीब 2400 करोड़ और सिंगल विलेज स्कीम में 3500 करोड़ रुपए से ज्यादा फंसे हुए हैं। अधिकतर ठेकेदारों ने बैंक से लोन लेकर काम शुरू किया था। लेकिन 2024 से ही भुगतान बंद होने के कारण ठेकेदार डिफॉल्टर होने लगे। अब सरकार जल्दी ही 600 करोड़ रुपए खर्च कर इन ठेकेदारों का भुगतान करने की तैयारी में है। इससे ठेकेदारों में उम्मीद जगी है। स्मॉल विलेज स्कीम के तहत 116 करोड़ जारी, राज्य भी इतनी राशि देगा केंद्र सरकार ने मंजूर किए गए 2000 करोड़ रुपए में से 116 करोड़ रुपए जारी कर दिया है। यह राशि स्मॉल विलेज स्कीम (एसवीएस) के तहत जारी की गई है। इतनी ही राशि राज्य सरकार देगी। यानी स्मॉल विलेज स्कीम पर इस वर्ष करीब 232 करोड़ रुपए खर्च होंगे। केंद्र ने कहा है कि मल्टी विलेज स्कीम (एमवीएस) की लंबित योजनाएं राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि से शुरू करे। धीरे-धीरे केंद्र से पैसे मिलेंगे। अब राज्य सरकार अपने हिस्से का करीब 600 करोड़ रुपए खर्च कर ठेकेदारों का भुगतान करेगी। केंद्र सरकार पैसे देने को तैयार, बचे काम जल्द पूरे होंगे : मंत्री 2024 में पूरी होनी थी योजना, अब 2028 का लक्ष्य… ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने के लिए 15 अगस्त 2019 को यह योजना लॉन्च की गई थी। इसे 2024 में पूरा करना था। लेकिन कोरोना के कारण 2022 में अलग-अलग राज्यों में इस पर काम शुरू हुआ। अब इसके पूरे होने की अवधि 2028 कर दी गई है। इस योजना में केंद्र और राज्य को 50%-50% राशि खर्च करनी है। इसके तहत दो स्कीम में काम होना है। एक मल्टी विलेज स्कीम और दूसरी सिंगल विलेज स्कीम। इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर नदी, झील और बड़े जलाशयों से पाइपलाइन के जरिए घरों में पानी पहुंचाना है। जहां ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां बोरिंग कराकर और टंकी बनाकर घर तक पानी पहुंचाना है।
टकराव खत्म, पटरी पर लौटेगी हर घर-नल जल योजना:केंद्र ने 2000 करोड़ रुपए मंजूर किए, शर्त…झारखंड पहले अपना हिस्सा खर्चे
