Thursday, August 13, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

डायबिटिक मरीजों के लिए नयी उम्मीद : फुट अल्सर में बैक्टीरिया का खात्मा करेगा यह वायरस वाला मरहम

डायबिटिक मरीजों के लिए नयी उम्मीद : फुट अल्सर में बैक्टीरिया का खात्मा करेगा यह वायरस वाला मरहम

कोलकाता से शिव कुमार राउत की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

डायबिटीज के मरीजों में होने वाले गंभीर डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज को लेकर एक नयी उम्मीद जगी है. पैर के घाव में मौजूद ऐसे बैक्टीरिया, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं भी असर नहीं करतीं, उन्हें खत्म करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के वैज्ञानिक एक खास तरह का ‘वायरस वाला मरहम’ तैयार कर रहे हैं.

बैक्टीरिया को पहचान कर नष्ट करने की क्षमता

‘वायरस वाला मरहम’में ऐसे वायरस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बैक्टीरिया को पहचान कर उसे नष्ट करने की क्षमता रखता है. आईसीएमआर के निदेशक डॉ शांतसबुज दास के अनुसार, डायबिटिक फुट अल्सर के इलाज में एंटीबायोटिक के विकल्प की तलाश लंबे समय से की जा रही है. इनमें एक महत्वपूर्ण विकल्प फेज है. फेज ऐसे विशेष वायरस होते हैं, जो बैक्टीरिया को संक्रमित कर नष्ट कर सकते हैं.

बैक्टीरिया को पहचान कर निबटायेगा

फेज पहले अपने लक्ष्य यानी बैक्टीरिया की पहचान करेगा और फिर उसकी कोशिका से चिपक जायेगा. इसके बाद वह अपना अनुवंशिक पदार्थ बैक्टीरिया की कोशिका के भीतर पहुंचा सकता है. धीरे-धीरे बैक्टीरिया की कोशिका पर उसका नियंत्रण हो जायेगा और अंततः बैक्टीरिया नष्ट हो जायेगा. डायबिटिक फुट अल्सर के मामलों में इस तकनीक की जरूरत इसलिए महसूस हो रही है, क्योंकि ऐसे घावों में कई तरह के बैक्टीरिया एक साथ मौजूद होते हैं. इनमें से कई बैक्टीरिया एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं. ऐसे में सामान्य दवाओं से संक्रमण को नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो जाता है.

एक नहीं, कई वायरस का ‘कॉकटेल’

आईसीएमआर के अनुसार, वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि डायबिटिक फुट अल्सर में एक ही तरह का बैक्टीरिया नहीं होता. अलग-अलग किस्म का बैक्टीरिया होने के कारण एक ही फेज हर बैक्टीरिया पर प्रभावी नहीं होता. इस समस्या को देखते हुए वैज्ञानिकों ने ‘फेज कॉकटेल’ तैयार करने की दिशा में काम किया है. इस कॉकटेल में अलग-अलग बैक्टीरिया को निशाना बनाने वाले कई फेज शामिल होंगे. इसे हाइड्रोजेल जैसी संरचना में तैयार कर सीधे घाव पर लगाया जा सकेगा. इसके बाद घाव पर पट्टी कर दी जायेगी. माना जा रहा है कि घाव में मौजूद दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया को निशाने पर लेते हुए यह फेज कॉकटेल संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करेगा.

क्यों बढ़ता है पैरों में घाव का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा रहने से शरीर की नसों और रक्त संचार पर असर पड़ता है. पैरों की संवेदना कम होने के कारण मरीज को कई बार पैर में चोट या कोई नुकीली चीज चुभने का पता तक नहीं चलता. धीरे-धीरे उसी स्थान पर घाव बन सकता है और संक्रमण फैल सकता है. डायबिटीज के मरीजों में घाव सामान्य लोगों की तुलना में देर से भरता है. संक्रमण बढ़ने पर मांसपेशियों, हड्डियों और त्वचा तक को नुकसान पहुंच सकता है. गंभीर स्थिति में संक्रमण पूरे शरीर में फैलकर सेप्सिस का कारण भी बन सकता है.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एंटीबायोटिक प्रतिरोध बड़ी चुनौती

डॉ दास के अनुसार, डायबिटिक फुट अल्सर के मामले में एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक गंभीर समस्या बन चुका है. ऐसे घावों में मौजूद बहु-बैक्टीरियल संक्रमण के कारण पारंपरिक एंटीबायोटिक उपचार कई बार बेहद जटिल हो जाता है. इसी वजह से फेज आधारित बाहरी उपचार को एक संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. फेज आधारित दवाओं के सेवन को लेकर अलग-अलग वैज्ञानिक और चिकित्सकीय चर्चाएं हैं, लेकिन घाव पर बाहरी रूप से इनके इस्तेमाल की दिशा में शोध आगे बढ़ाया जा रहा है. यदि यह तकनीक सफल हो जाती है, तो एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों के इलाज में यह एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है.

Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में

The post डायबिटिक मरीजों के लिए नयी उम्मीद : फुट अल्सर में बैक्टीरिया का खात्मा करेगा यह वायरस वाला मरहम appeared first on Prabhat Khabar.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles