जेल से रिहा हुए बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग देने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां ने पहल शुरू की है। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष , डीएलएसए रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में रिहा बंदियों को काउंसलिंग, पुनर्वास सहायता तथा पात्रता के अनुसार नालसा की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। झालसा की ओर से रिहा बंदियों की सूची एवं आवश्यक दिशा-निर्देश डीएलएसए को उपलब्ध कराए गए हैं। जिले को कुल 26 रिहा बंदियों की सूची प्राप्त हुई है। इनमें एक बंदी, जो गंभीर अपराध के मामले में दोषसिद्ध था और राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के निर्णय के बाद रिहा हुआ, डीएलएसए के समक्ष उपस्थित हुआ। डीएलएसए के सचिव तौसीफ मेराज ने उक्त बंदी को व्यक्तिगत रूप से काउंसलिंग दी। इस दौरान रिहाई के बाद पुनर्वास, भविष्य की संभावनाओं और समाज में दोबारा स्थापित होने के दौरान आने वाली संभावित कठिनाइयों पर चर्चा की गई। उसे विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से उपलब्ध सहायता एवं सहयोग की जानकारी भी दी गई। सचिव ने संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि बंदी की पात्रता के अनुसार नालसा की संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। डीएलएसए की इस पहल का उद्देश्य रिहा बंदियों को केवल कानूनी सहायता देना नहीं, बल्कि पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन के माध्यम से उन्हें स्थिर एवं गरिमापूर्ण जीवन की ओर आगे बढ़ने में सहयोग करना है।
