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सीवान में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर प्रत्येक मंगलवार को ‘साइबर मंगलवार’ अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अभियान के तहत जिले के विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध से बचाव और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यार्थियों को डिजिटल लेन-देन में बचने की सलाह प्रभारी साइबर डीएसपी निशिकांत भारती ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रत्येक मंगलवार को स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसमें विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने के खतरे, डिजिटल लेन-देन में सावधानी और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की जानकारी दी जाएगी। डीएसपी ने कहा कि विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी देने का उद्देश्य केवल उन्हें सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उनके माध्यम से परिवार और समाज तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचाना है। छात्र साइबर अपराध के तरीकों को समझकर अपने परिजनों और आसपास के लोगों को भी सतर्क कर सकेंगे। इसके अलावा विभिन्न सहयोग शिविरों के माध्यम से आम लोगों को भी साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए जाएंगे। बैंक खातों से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करें अभियान के दौरान लोगों को विशेष रूप से डिजिटल लेन-देन के समय सतर्क रहने की सलाह दी जाएगी। डीएसपी ने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, एटीएम या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक अधिकारी कभी भी फोन पर इस तरह की व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगते हैं। लोगों को लॉटरी जीतने, बिजली बिल बकाया होने, कनेक्शन काटने या बैंक खाता बंद होने जैसे संदेशों के जरिए भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक से भी सावधान रहने को कहा गया है। ऐसे लिंक पर क्लिक करने से साइबर ठग लोगों के बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। साइबर डीएसपी ने इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर खोजने के दौरान भी सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि सर्च इंजन पर दिखाई देने वाले रैंडम नंबरों पर भरोसा करने के बजाय संबंधित कंपनी या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क नंबर का ही इस्तेमाल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो घबराने या देर करने के बजाय तत्काल कार्रवाई जरूरी है। पीड़ित को तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए और सरकारी साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर सूचना मिलने से संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के साथ समन्वय कर ठगी की रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस का मानना है कि नियमित जागरूकता अभियान से लोगों में डिजिटल सुरक्षा की समझ बढ़ेगी और साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

