Saturday, August 22, 2026

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डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने की बड़ी कार्रवाई:राजद के पूर्व एमएलसी के बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस डीसी ने रद्द किया


गैर-पंजीकृत स्टॉक फैक्ट्री में छुपा कर रखा गया था राजधानी से सटे ओरमांझी के उकरीद स्थित मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 18 अगस्त को तत्काल प्रभाव से रद्द (विखंडित) कर दिया है। यह प्लांट बिहार के राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय का है। डीसी ने आरोपियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को पूरी तरह खारिज करते हुए उत्पाद अधिनियम के तहत यह सख्त कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि लाइसेंसी परिसर में अवैध व्हिस्की तैयार कर उत्पाद कर की चोरी की नीयत से गैर-पंजीकृत स्टॉक छुपाया गया था। इस मामले में पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार, देवेंद्र भगत और रविकांत राय को पहले ही जेल भेजा गया था। हालांकि इस मामले में तरंगनी के संचालक सुबोध कुमार को इस मामले में जमानत मिल चुकी है और वे जेल से बाहर आ गए है। इस मामले में छापेमारी के बाद एक जुलाई को उत्पाद दारोगा रूपेश कुमार ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप था कि प्लांट में अवैध रूप से सेल फॉर यूपी व सेल फॉर दिल्ली के नाम पर तैयार शराब पकड़ा गया। जो वहीं तैयार किया जा रहा था। सीलबंद प्लांट में हुई थी चोरी, साक्ष्य कर दिए गए थे गायब मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया था जब सरकारी सील लगे बॉटलिंग प्लांट से शराब की पेटियां और अहम साक्ष्य ही गायब पाए गए। 1 जुलाई को उत्पाद विभाग और ओरमांझी पुलिस की संयुक्त छापेमारी के बाद प्लांट को सील कर दिया गया था। नियमानुसार भौतिक सत्यापन और डिजिटल स्टॉक मिलान के लिए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में त्वरित जांच होनी थी, लेकिन यह जांच डेढ़ महीने तक टलती रही। 17 अगस्त को जब प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की मौजूदगी में सील तोड़ा गया, तो पीछे के दरवाजे का ताला टूटा मिला। प्लांट के अंदर रखी शराब की पेटियां और महत्वपूर्ण दस्तावेज व साक्ष्य नदारद थे। केस कमजोर करने की सोची-समझी साजिश सूत्रों के अनुसार, यह कोई साधारण चोरी नहीं थी बल्कि अदालत में क्लीन चिट दिलाने के लिए रची गई सुनियोजित साजिश थी। कोर्ट में यह साबित करने के लिए कि जब्त कंसाइनमेंट इसी प्लांट में गैरकानूनी ढंग से तैयार हो रहा था, भीतर मौजूद केमिकल फॉर्मूलेशन, संबंधित बैच और भौतिक स्टॉक ही सबसे अहम साक्ष्य थे। साक्ष्य गायब होने से अब अभियोजन पक्ष के लिए यह साबित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा कि यूपी व दिल्ली के लेबल लगाकर बेची जा रही शराब इसी फैक्ट्री से निकली थी। 1 जुलाई की छापेमारी में बड़े पैमाने पर जब्त हुई थी अवैध शराब जब्त ट्रक नंबर: BR 01GK 2862

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