दरभंगा में मंगलवार को ल्लपट्टी की ओर बढ़ते हुए बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जों को हटाया। एक दिन पहले एसडीएम विकास कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने पहले एकमी से हाजमा चौक तक अतिक्रमण हटाया था। दरअसल, दरभंगा में प्रस्तावित एम्स कनेक्टिविटी परियोजना को लेकर जिला प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। एकमीघाट से दरभंगा रेलवे स्टेशन तक बनने वाली एलिवेटेड सड़क के निर्माण को लेकर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। ये सड़क शोभन-एकमी फोरलेन परियोजना का हिस्सा है, जिसकी कुल लंबाई करीब 13 किलोमीटर होगी और इस परियोजना पर लगभग 338 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने का कार्य लगातार जारी है। अतिक्रमण हटाने के दौरान मौजूद रहा पुलिस बल कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन के कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे। दो बुलडोजरों की मदद से सड़क किनारे बने अस्थायी दुकानों और अवैध निर्माणों को हटाया गया। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण कार्रवाई लगातार जारी रही। एसडीएम विकास कुमार ने बताया कि ये एलिवेटेड सड़क शहर को जाम से राहत देने और प्रस्तावित एम्स तक लोगों की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्राथमिकता वाली विकास परियोजना है और अधिकतर लोगों का सहयोग प्रशासन को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। महिला बोली- छोटे से होटल से 6 परिवारों का घर चलता है, अब खाने पर भी संकट अतिक्रमण के जद में आने वाले एक होटल की संचालिका सुनीता देवी ने बताया कि मेरे परिवार में छह सदस्य हैं और इसी छोटे होटल से परिवार का भरण-पोषण होता था। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्देश पर दुकान हटानी पड़ रही है, लेकिन अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सामान हटाकर दूसरी जगह ठिकाना तलाशना मजबूरी बन गई है। दूसरी ओर होटल चलाने वाली मनीषा ने बताया कि पिछले सात वर्षों से वह इसी दुकान के सहारे परिवार चला रही थीं। दाल-भात और सब्जी बेचकर सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण होता था। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश पर दुकान हटा रहे हैं, लेकिन अब पक्की दुकान बनाना संभव नहीं है। आगे ठेले पर ही दुकान लगाकर परिवार चलाने की कोशिश करेंगे। ‘अतिक्रमण हटाना ठीक, लेकिन छोटे दुकानदारों का पुनर्वास कराया जाए’ स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन की ओर से हटाए जा रहे अतिक्रमण को लेकर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और एम्स तक पहुंच आसान बनेगी, लेकिन विस्थापित हो रहे छोटे दुकानदारों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर भी प्रशासन को ठोस पहल करनी चाहिए।
दरभंगा में लगातार दूसरे दिन हटाया गया अतिक्रमण:एम्स कनेक्टिविटी के लिए बुलडोजर एक्शन, एलिवेटेड सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई तेज
दरभंगा में मंगलवार को ल्लपट्टी की ओर बढ़ते हुए बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जों को हटाया। एक दिन पहले एसडीएम विकास कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने पहले एकमी से हाजमा चौक तक अतिक्रमण हटाया था। दरअसल, दरभंगा में प्रस्तावित एम्स कनेक्टिविटी परियोजना को लेकर जिला प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। एकमीघाट से दरभंगा रेलवे स्टेशन तक बनने वाली एलिवेटेड सड़क के निर्माण को लेकर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। ये सड़क शोभन-एकमी फोरलेन परियोजना का हिस्सा है, जिसकी कुल लंबाई करीब 13 किलोमीटर होगी और इस परियोजना पर लगभग 338 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने का कार्य लगातार जारी है। अतिक्रमण हटाने के दौरान मौजूद रहा पुलिस बल कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन के कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे। दो बुलडोजरों की मदद से सड़क किनारे बने अस्थायी दुकानों और अवैध निर्माणों को हटाया गया। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण कार्रवाई लगातार जारी रही। एसडीएम विकास कुमार ने बताया कि ये एलिवेटेड सड़क शहर को जाम से राहत देने और प्रस्तावित एम्स तक लोगों की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्राथमिकता वाली विकास परियोजना है और अधिकतर लोगों का सहयोग प्रशासन को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। महिला बोली- छोटे से होटल से 6 परिवारों का घर चलता है, अब खाने पर भी संकट अतिक्रमण के जद में आने वाले एक होटल की संचालिका सुनीता देवी ने बताया कि मेरे परिवार में छह सदस्य हैं और इसी छोटे होटल से परिवार का भरण-पोषण होता था। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्देश पर दुकान हटानी पड़ रही है, लेकिन अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सामान हटाकर दूसरी जगह ठिकाना तलाशना मजबूरी बन गई है। दूसरी ओर होटल चलाने वाली मनीषा ने बताया कि पिछले सात वर्षों से वह इसी दुकान के सहारे परिवार चला रही थीं। दाल-भात और सब्जी बेचकर सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण होता था। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश पर दुकान हटा रहे हैं, लेकिन अब पक्की दुकान बनाना संभव नहीं है। आगे ठेले पर ही दुकान लगाकर परिवार चलाने की कोशिश करेंगे। ‘अतिक्रमण हटाना ठीक, लेकिन छोटे दुकानदारों का पुनर्वास कराया जाए’ स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन की ओर से हटाए जा रहे अतिक्रमण को लेकर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और एम्स तक पहुंच आसान बनेगी, लेकिन विस्थापित हो रहे छोटे दुकानदारों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर भी प्रशासन को ठोस पहल करनी चाहिए।

