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दीघा वेंडिंग जोन में लगेंगी 50 प्री-फैब्रिकेटेड दुकानें:38 दुकानों का स्ट्रक्चर तैयार, जेपी गंगा पथ पर नहीं लगेगी कोई भी दुकान


पटना के जेपी गंगा पथ पर 50 प्री-फैब्रिकेटेड दुकानें लगनी थी, मगर अब इसका ठिकाना बदल गया है। दीघा गोलंबर के पास वेंडिंग जोन बन रहा है, वहीं दुकानें शिफ्ट होंगी। अब तक 38 दुकानों का स्ट्रक्चर तैयार हो गया है और बाकी पर काम चल रहा है। गंगा किनारे की सुंदरता बनाए रखने, दुर्घटनाएं रोकने और दानापुर की ओर से पीएमसीएच जाने वाली एंबुलेंसों को जाम से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। वहीं, जेपी गंगा पथ को ग्रीन एरिया के रूप में विकसित किया गया है। दीघा में वेंडिंग जोन का 3D इमेज… 1.93 एकड़ में बन रहा दीघा वेडिंग जोन पटना के गंगा पथ में दुकानदारों के लिए वेडिंग जोन डेवेलप किया जा रहा है। 250 दुकानदारों को यहां शिफ्ट करने की तैयारी है। 1.93 एकड़ में बन रहे इस वेडिंग जोन में इंटरटेनमेंट जोन, ऐम्फीथिएटर, किड्स जोन का निर्माण किया जाएगा। दीघा गोलंबर के नीचे और अटल पथ के पास खाली जमीन पर यह वेंडिंग जोन विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गंगा पथ की सड़क को अतिक्रमण मुक्त करना और जाम की समस्या को कम करना है। इसे दो फेज में तैयार किया जाएगा। सेल्फी पॉइंट भी बनाए जाएंगे पहले फेज में पीसीसी सड़क और पेवर ब्लॉक बिछाकर दुकानदारों को जगह आवंटित की जाएगी। 15 मई तक शिफ्टिंग का लक्ष्य रखा गया था। दूसरे फेज में इस एरिया को डेवेलप करते हुए एक इंटरटेनमेंट जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। नए वेंडिंग जोन में पार्किंग, शौचालय, पेयजल और हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था होगी। इसमें खास तरह के डेकोरेटिव लाइट्स लगाए जाएंगे। खूबसूरत तरीके से प्लांटेशन और लैंडस्केपिंग होगी। इसके साथ ही सेल्फी पॉइंट भी बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने पुराने डिजाइन को किया था खारिज इससे पहले जेपी गंगा पथ पर पहले के फैब्रिकेटेड दुकानों को हटा दिया गया था। सीएम हाउस से पहले के फैब्रिकेटेड दुकानों के डिजाइन को चेंज करने का निर्देश दिया गया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पुराने डिजाइन को खारिज कर दिया था। बताया गया कि पहले लगाए गए स्टॉल में कई खामियां पाई गई हैं। इससे स्टॉल संचालकों के साथ ही ग्राहकों को काफी दिक्कत होती। ऐसे में डिजाइन को बदलने का निर्णय लेना पड़ा था। आवंटन के लिए 280 वेंडरों को चिह्नित किया गया था गंगा पथ के दीघा गोलंबर के पास लंबे समय से स्टॉल लगाने वाले वेंडरों की पहचान की जा चुकी थी। 280 वेंडरों को चिह्नित किया गया था। इन वेंडरों को प्राथमिकता के आधार पर स्टॉल दिए जाते। उसके बाद जो स्टॉल बचते, उनके आवंटन के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती। तीन आकार में दुकानें डिजाइन की गई थी। प्रत्येक दुकान में बेसिन, स्लैब, एग्जॉस्ट फैन, लाइट, इलेक्ट्रिक बोर्ड और अन्य जरूरी सुविधाएं दी गई थी। करीब 15.45 करोड़ रुपए की लागत से इन दुकानों को तैयार किया जा रहा था। 50 प्री-फैब्रिकेटेड दुकान बनाने का लिया गया निर्णय गंगा पथ पर 50 दुकानों के निर्माण की बात आयी। इसके लिए 2 डिजाइनों को फाइनल कर लिया गया था। इसका काम भी शुरू था। नई दुकानों को तैयार करने में करीब 7.18 करोड़ रुपए खर्च था। इनमें से 45 दुकानें 16 फुट लंबी, 10 फुट चौड़ी और 9 फुट ऊंची होती। इसके अलावा पांच दुकानें 20 फुट लंबी, 10 फुट चौड़ी और 9 फुट ऊंची बनाई जाती। सभी दुकानों का डिजाइन एक समान आधुनिक लुक में होता, ताकि पूरा क्षेत्र व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई दे।
10-10 के पांच समूहों में दुकानें लगाने की थी तैयारी जेपी गंगा पथ पर दुकानों को 10-10 के पांच समूहों में लगाया जाना था। हर समूह में 16 फुट आकार की 9 दुकानें और 20 फुट आकार की एक दुकान होती। इस तरह का लेआउट रखने से जगह का बेहतर उपयोग होता और देखने में भी क्षेत्र संतुलित लगता। दुकानों में बिजली, ड्रेनेज, प्लंबिंग, एलइडी लाइटिंग, ऊर्जा बचत वाले उपकरण और ब्रांडिंग की सुविधा रहती। सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जाना था।

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