“दीदी नदी में नहा रही थी। वह बार-बार बांध से पानी में छलांग लगा रही थी। दो बार कूदने के बाद वह सुरक्षित बाहर आ गई, लेकिन तीसरी बार कूदने पर पानी में डूब गई। पहले हमें लगा कि वह मजाक कर रही है, इसलिए हमने ध्यान नहीं दिया। बाद में समझ आया कि वह सचमुच डूब गई है।” किशनगंज में 13 साल की मेनका कुमारी की मौत के मामले में उसके दो मौसेरे भाइयों ने पुलिस पूछताछ के दौरान यह जानकारी दी है। दोनों बताया कि घटना के बाद वे घबरा गए थे। मामा के डर से उन्होंने घर पहुंचकर झूठ बोल दिया कि मेनका शौच के लिए पीपल के पेड़ के पास गई थी और वहां से वापस नहीं लौटी। एसपी संतोष कुमार ने बताया कि मामले के दोनों प्रत्यक्षदर्शी भाइयों ने अपनी मर्जी से न्यायालय में भी बयान दर्ज कराया है। केस की जांच सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। घटना से जुड़े 3 PHOTOS.. अब सिलसिलेवार पढ़िए, खुलासे की कहानी पुलिस ने दोनों भाइयों से बारी बारी से की पूछताछ
नदी की छानबीन के बाद पुलिस को मिले सुराग के अनुसार दोनों भाइयों को पुलिस ने बारी बारी पूछताछ की। शुरुआत में दोनों भाई लगातार अपने बयान बदल रहे थे। बाद में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर और परिजनों की मौजूदगी में सौहार्दपूर्ण तरीके से पूछताछ करने पर दोनों ने पूरी घटना का खुलासा किया। दोनों भाइयों ने बताया कि वे नदी में स्नान करने गए थे। इस दौरान मेनका नदी किनारे बने बांध से पानी में छलांग लगा रही थी। दो-तीन बार वह सुरक्षित बाहर आ गई, लेकिन एक बार वह अधिक गहराई वाले हिस्से में पहुंच गई और डूबने लगी। मेनका ने बचाने का इशारा भी किया, लेकिन भाइयों को पहले लगा कि वह मजाक कर रही है। घरवालों से कहा- मेनका शौच के लिए घर लौट गई थी
जब तक उन्हें स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, तब तक वह गहरे पानी में चली गई थी। दोनों ने उसे बचाने का प्रयास किया, एक राहगीर से मदद मांगी, लड़के ने कहा इस दौरान उसकी किसी ने भी मदद नहीं की। घटना के बाद दोनों भाई घबरा गए। घरवालों के डर से उन्होंने झूठ बोल दिया कि मेनका शौच के लिए घर लौट गई थी। नदी में मिट्टी कटाई से बढ़ गई थी गहराई
जांच में यह भी सामने आया कि नदी से मिट्टी निकालकर बांध बनाया जा रहा था, जिससे नदी के कुछ हिस्सों में गहराई बढ़ गई थी। पुलिस के अनुसार कहीं पानी की गहराई 3 से 4 फीट थी तो कहीं 10 से 30 फीट तक पहुंच गई थी। इसी गहरे हिस्से में किशोरी डूब गई। एसपी ने कहा कि वैज्ञानिक जांच, तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले की जांच पूरी कर ली गई है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 जून को घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया गया। इसके बाद पुलिस ने मौके पर कैंप कर जांच तेज कर दी। 5 जून को गोताखोरों की मदद से नदी में तलाशी की गई। जांच में डॉग स्क्वॉड और एफएसएल टीम की सहायता ली गई। वैज्ञानिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण से पुष्टि हुई कि मेनका अपने दो मौसेरे भाइयों आयुष (10 वर्ष) और प्रिंस (15 वर्ष) के साथ नदी की ओर गई थी, लेकिन वापस केवल दोनों लड़के लौटे थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मेनका की मौत का कारण डूबने से दम घुटना (Asphyxia) और शॉक बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों को उसकी श्वासनली (ट्रेकिया) में मिट्टी और रेत के कण मिले हैं। दोनों फेफड़ों में भी मिट्टी और रेत के कण पाए गए हैं। इसके अलावा पेट में करीब 300 एमएल कीचड़ मिला पानी मौजूद होने का जिक्र किया गया है। वहीं, रिपोर्ट में सिर, खोपड़ी, मस्तिष्क और छाती पर किसी गंभीर चोट का उल्लेख नहीं किया गया है। परिवार ने हत्या का लगाया था आरोप
बच्ची की लाश मिलने के बाद परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। बच्ची की मां पिंकी देवी ने कहा पुलिस ने लापता होने के दो दिन तक केस दर्ज नहीं किया और आवदेन में गलतियां बताकर लौटाते रहे। उनका आरोप था कि पुलिस की लापरवाही और केस दर्ज करने में ढिलाई की जिसकी वजह से बच्ची की जान गई। परिवार के आरोप के बाद शहर भर में हंगामा हुआ। लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किए, और कैंडल मार्च निकाला। पुलिस बोली- केस में लापरवाही की जांच की जा रही
पुलिस के अनुसार मामले की प्रारंभिक जांच और प्राथमिकी दर्ज करने में बरती गई संभावित लापरवाही की जांच अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी से कराई जा रही है। साथ ही पुलिस कार्य और अनुसंधान में बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।


