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शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर रविवार सुबह आठ बजे से मधुबनी शहर के सप्ता स्थित भगवती स्थान दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। वहीं, बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार खोइंछा भरने की रस्म निभाती नजर आईं। अष्टमी के अवसर पर भगवती स्थान दुर्गा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की काफी चहल-पहल रही। पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिसकर्मियो ने किया भीड़ को नियंत्रित मधुबनी नगर थाना और यातायात थाना की पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखी। पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने में जुटे रहे, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। इस संबंध में मधुबनी नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार, पूजा समिति के अध्यक्ष रंजन कुमार, सचिव प्रत्यूष कुमार, वरिष्ठ सदस्य मनोज कुमार मुन्ना एवं अभिषेक कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों एवं अन्य माध्यमों से लगातार निगरानी रखी जा रही है। सक्रिय दिखे समिति के सदस्य समिति के सदस्य भी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मौके पर पूजा समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद एवं कैलाश राजपाल, उपसचिव शैवाल सिंह, कोषाध्यक्ष सुमन कुमार, सहकोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, अंकेक्षक मोहन राउत, पूजा प्रभारी परशुराम प्रसाद और मेला प्रभारी आनंद पंजियार उपस्थित रहे इसके अतिरिक्त विजय कुमार गुप्ता, अशोक झा, राजेश कुमार, उमेश कुमार (बब्लू), रौशन कुमार, निखिल कुमार, आदित्य कुमार (गोलू), अभिजीत कुमार, बादल कुमार, विजय यादव, पिंटू मिश्रा, रूपेश कुमार, गुड्डू कुमार, अभिराज (छोटू), करण कुमार, अविनाश कुमार, लव कुमार, प्रशांत कुमार एवं गोलू कुमार सहित पूजा समिति के अन्य सक्रिय सदस्य श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।
दुर्गा मंदिर में अष्टमी पर उमड़ी भक्तों की भीड़:महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज से की खोइंछा भरने की रस्म, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
