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देवघर आदिवासी छात्रावास में सुविधाओं का अभाव:रसोई गैस, बिजली-पानी संकट से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित, घर लौटने को हुए मजबूर


देवघर स्थित आदिवासी बाल कल्याण छात्रावास गंभीर अव्यवस्था का सामना कर रहा है। यहां 150 से अधिक छात्र रहते हैं, जिनकी पढ़ाई मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बुरी तरह प्रभावित हो रही है। छात्रावास में रसोई गैस, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं लंबे समय से बाधित हैं, जिससे छात्रों की दिनचर्या और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। छात्रों के अनुसार, कई दिनों से रसोई गैस की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे उन्हें खाना बनाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार छात्रों को बाजार से महंगे दामों पर छोटे सिलेंडर खरीदने पड़ते हैं। इस स्थिति के कारण कुछ छात्र छात्रावास छोड़कर अपने घरों को लौटने लगे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। बिजली की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। नियमित बिजली आपूर्ति न होने के कारण छात्र रात में पढ़ाई नहीं कर पाते। मजबूरी में, कुछ छात्र पास के सत्संग कॉलेज कैंपस से तार जोड़कर बिजली लेने का प्रयास करते हैं, जो बेहद खतरनाक है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। छात्रावास के शौचालयों की स्थिति जर्जर पानी की किल्लत भी छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नहाने और दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, छात्रावास के शौचालयों की स्थिति जर्जर है; उनके दरवाजे टूटे हुए हैं और बेसिन के नल खराब पड़े हैं। इस संबंध में उप छात्र नायक मुनेश्वर टुडू ने बताया कि वे लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। वहीं, जिला कल्याण पदाधिकारी दयानंद दुबे ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी अब मिली है और इस पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। छात्रों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि छात्रों को बेहतर सुविधाएं और एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

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