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वर्दी की सख्ती के पीछे छिपी संवेदनशीलता अब देवघर के उन बुजुर्गों का सहारा बन रही है, जो घरों में अकेले रहते हैं। देवघर पुलिस ने ‘सम्मान’ योजना के जरिए वरिष्ठ नागरिकों के इर्द-गिर्द भरोसे का एक ऐसा घेरा बुना है, जहां मदद के लिए केवल एक रिंग की दूरी है। एसपी सौरभ की इस पहल से अब तक 70 साल से अधिक उम्र के 26 बुजुर्ग जुड़ चुके हैं। योजना का मकसद सिर्फ अपराध रोकना नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों को यह अहसास कराना है कि इस शहर में पुलिस उनका ‘बेटा’ बनकर खड़ी है। देवघर पुलिस की ‘सम्मान’ योजना उन दंपतियों या अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें उम्र के इस पड़ाव में सहारे की सबसे ज्यादा दरकार है। योजना के तहत पंजीकृत हर बुजुर्ग के लिए पुलिस ने एक ‘पर्सनल’ सुरक्षा तंत्र विकसित किया है। जानिए…योजना में जुड़ने के लिए क्या करना होगा हेल्पलाइन नंबर: बुजुर्ग 9296913007 नंबर पर कॉल कर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन। पात्रता: 70 वर्ष से अधिक आयु के अकेले रह रहे बुजुर्ग। रजिस्ट्रेशन स्लिप: पंजीकरण के बाद पुलिस घर आकर पूरी प्रोफाइल तैयार करती है और एक स्लिप देती है। सुरक्षा ऑडिट: घर के प्रवेश द्वारों की सुरक्षा जांच और घरेलू सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन। फॉलोअप: हर 15 दिन में व्यक्तिगत मुलाकात अनिवार्य। प्रॉपर्टी से लेकर टूटी नाली तक दुरुस्त कराया योजना से जुड़े अधिकांश बुजुर्ग आर्थिक रूप से समृद्ध हैं, लेकिन अकेलापन उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बना रहता है। पुलिस अब उनकी संपत्तियों पर गलत नजर रखने वालों पर भी निगरानी रख रही है। पुलिस केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को भी हल कर रही है। हाल ही में कुछ बुजुर्गों की शिकायत पर उनके घर के सामने की टूटी नाली ठीक करवाई। सब इंस्पेक्टर रैंक के अफसर करते हैं सुरक्षा ऑडिट योजना से जुड़ते ही संबंधित थाना क्षेत्र के एक सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) रैंक के अधिकारी को उस बुजुर्ग के साथ ‘अटैच’ कर दिया जाता है। यह अधिकारी न केवल बुजुर्ग के घर जाकर सुरक्षा का ऑडिट करता है, बल्कि हर 15 दिन में उनसे मिलकर हाल-चाल भी जानता है। पुलिस घर के दरवाजों की मजबूती से लेकर नौकरों और किरायेदारों तक का सत्यापन खुद कर रही है, ताकि बुजुर्गों को किसी भी तरह के खतरे का सामना न करना पड़े।

