Sunday, June 14, 2026

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देवघर हाईवे किनारे बना स्वास्थ्य केंद्र बंद:‘गोल्डन आवर’ में नहीं मिल रहा इलाज, तीन साल पहले बना भवन, सेवाएं अब तक शुरू नहीं


देवघर-दुमका-बासुकीनाथ नेशनल हाईवे पर स्थित खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं होने से क्षेत्र में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। यह महत्वपूर्ण मार्ग बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम को जोड़ता है, जहां सालभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सावन माह में यहां लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में हाईवे किनारे स्थित स्वास्थ्य केंद्र का बंद रहना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित यह केंद्र आसपास के हजारों ग्रामीणों के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो सकता था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। तीन साल पहले बना भवन, सेवाएं अब तक शुरू नहीं ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का भवन करीब तीन से चार वर्ष पूर्व बनकर तैयार हो गया था, लेकिन आज तक यहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बहाल नहीं हो सकी हैं। आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मी महीने में केवल कुछ दिन ही आते हैं। बाकी समय केंद्र बंद रहता है। इसके कारण सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सड़क दुर्घटनाओं के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब घायलों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता। उन्हें सीधे देवघर या दुमका रेफर करना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होती है। कई बार मरीज की हालत बिगड़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए इस केंद्र का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ‘गोल्डन आवर’ में इलाज न मिलना गंभीर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद कुमार ने बताया कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा ‘गोल्डन आवर’ होता है, जो जीवन बचाने के लिए सबसे अहम माना जाता है। यदि इस दौरान प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। लेकिन केंद्र के बंद रहने से यह महत्वपूर्ण समय व्यर्थ हो रहा है। इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि उन्हें केंद्र के नियमित रूप से बंद रहने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और स्वास्थ्य केंद्र को नियमित रूप से संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल यह सवाल बना हुआ है कि करोड़ों की लागत से बना यह केंद्र कब तक आम लोगों को वास्तविक स्वास्थ्य सुविधा दे पाएगा।

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