Sunday, August 9, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

देश की 'टॉप गन' बनी बिहार की भावना की कहानी:बेगूसराय से पढ़ाई, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग कर एयरफोर्स को चुना; मामा बोले- फाइटर जेट से इन्सपायर थी


‘भावना बचपन में हवाई जहाज देखती थीं। ये नहीं बोलती थी कि मैं एक दिन जहाज उड़ाऊंगी, लेकिन उसे देखकर लगता था कि वो ऐसा एक दिन जरूर करेगी। वो हम लोगों से हमारे ही गांव के रहने वाले डॉ. मानस बिहारी वर्मा के बारे में पूछती थी। मानस स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस प्रोजेक्ट से जुड़े थे।’ अंबुज लाल, भावना कंठ के मामा ‘मेरी नतिनी भावना का जन्म हुआ था, तब मैंने नहीं सोचा था कि मेरी नतिनी एक दिन देश की रक्षा के लिए फाइटर प्लेन उड़ाएगी। जब-जब उसका नाम और उसकी तस्वीर अखबार या टीवी में देखती हूं, गर्व होता है। जब वो गांव आती है, उसे देखकर नहीं लगता कि वो अन्य महिलाओं से हटकर, घर की चाहरदीवारी से निकलकर देश की रक्षा में जुटी है।’ दुर्गा देवी, भावना कंठ की नानी दरभंगा की भावना कंठ की इन दिनों देश में चर्चा है। स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) का प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स पूरा किया है। ऐसा करने वाली वे देश की पहली महिला फाइटर पायलट हैं। इस कोर्स को पूरा करने के बाद उन्हें ‘टॉप गन’ की पहचान मिली है। अब वे हवाई युद्ध अभियानों की अगुआई भी कर सकेंगी। ‘टॉप गन’ भावना कंठ की कहानी क्या है? पढ़ाई-लिखाई कहां से हुई है? देश सेवा में जाने की उनकी कहानी क्या है? उनके बारे में उनके ननिहाल और दादा-दादी के परिवार के लोगों का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले भावना कंठ के बारे में जानिए भावना कंठ दरभंगा जिले के घनश्यामपुर ब्लॉक में कमला नदी के किनारे बसे बाउर गांव की रहने वाली हैं। हालांकि, उनका जन्म, परवरिश और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बेगूसराय के बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप के डीएवी पब्लिक स्कूल में हुई है। भावना के पिता तेज नारायण कंठ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। मां राधा कंठ हाउस वाइफ हैं। पिता की नौकरी के कारण पूरा परिवार बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप में रहता था। भावना ने डीएवी स्कूल से ही साल 2009 में 10वीं पास की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए राजस्थान के कोटा चली गईं। 12वीं तक की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कोटा में ही इंजीनियरिंग की तैयारी भी की। इसके बाद भावना ने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई का चार साल का कोर्स किया। बीटेक के बाद एयरफोर्स की वैकेंसी आई तो उसने आवेदन किया और पहली बार में चयन हो गया। दरअसल, साल 2015 में ही केंद्र सरकार ने पहली बार महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम का रास्ता खोला। इसके बाद जून 2016 में भावना कंठ भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बैच का हिस्सा बनीं। इसके बाद उन्होंने मार्च 2018 में मिग-21 बाइसन की सोलो उड़ान भरी। मई 2019 में डे ऑपरेशनल सिलेबस पूरा कर दिन में लड़ाकू मिशन उड़ाने की अनुमति पाने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। भावना कंठ को 8 मार्च 2020 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। भावना के परिवार की 2 तस्वीरें देखिए आखिरी बार साल 2024 में दरभंगा आई थीं भावना कंठ भावना तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। छोटी बहन भी इंजीनियर हैं, जबकि छोटा भाई एनटीपीसी में ओडिशा में कार्यरत है। भावना के माता-पिता बेटे के पास ओडिशा में ही रहते हैं। 2022 में बिहार के ही दरभंगा के रहने वाले एयरफोर्स जवान से भावना की शादी हुई है। भावना का ननिहाल दरभंगा जिले के केवटी ब्लॉक के केवटी गांव में है। यहां आज भी भावना की नानी, मामा, मामी और अन्य रिश्तेदार रहते हैं। बचपन की छुट्टियों में भावना अक्सर ननिहाल आती थीं। साल 2024 में वे आखिरी बार अपने गांव आई थीं। भावना के मामा अंबुज लाल ने बताया कि भावना के परिवार के सदस्य साल में एक-दो बार गांव जरूर आते हैं। गांव की कुलदेवी की पूजा, किसी की शादी, उपनयन, मुंडन जैसे पारिवारिक संस्कारों में पूरा परिवार एक साथ मौजूद रहता है। भावना की मामी ममता देवी कहती हैं कि मेरी भांजी पढ़ाई में शुरू से तेज थी। संस्कार भी बहुत अच्छे हैं। मेरी बेटी की शादी साल 2023 में हुई थी, तब भी भावना ननिहाल आई थी। एयरफोर्स में जाने के बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं आया। भोज में सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया और लोगों की मदद भी करती रही। उन्होंने कहा कि भावना आज भी परिवार के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में शामिल होने का प्रयास करती हैं। वहीं, नानी दुर्गा देवी बताती हैं कि इतनी बड़ी अधिकारी बनने के बाद भी मेरी नतिनी बिल्कुल सामान्य तरीके से रहती है। उसके संस्कार देखकर कोई नहीं कहेगा कि वे देश की शीर्ष फाइटर पायलटों में शामिल हैं। वे बताती हैं कि नतिनी की पोस्टिंग पंजाब में हैं। कभी-कभी फोन और वीडियो कॉल पर बात हो जाती है। दो बांधों के बीच बसा है भावना का गांव, पैतृक घर पर लटका है ताला भावना का पैतृक गांव दरभंगा मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर है। भास्कर रिपोर्टर जब भावना कंठ के पैतृक गांव बाउर स्थित उनके घर पहुंचा तो वहां ताला लटका मिला। घर में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। भावना का बाउर गांव दो बांधों के बीच बसा है। कमला नदी के दोनों ओर से घिरे इस इलाके में बारिश होते ही लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। गांव तक पहुंचने वाली सड़क पानी में डूब जाती है और रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। कई बार ऐसी स्थिति बनती है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने पर वे टापू की तरह रहने को मजबूर हो जाते हैं। भावना के पड़ोसी चाचा पप्पू लाल ने कहा कि भावना ने बचपन में कुछ समय गांव के सरकारी स्कूल में भी पढ़ाई की थी। बाद में वह अपने पिता के साथ रहकर पढ़ाई करने लगीं। एयरफोर्स में शामिल होने के बाद भी वो कई बार गांव आ चुकी हैं। भावना की चाची किरण देवी ने कहा कि हमें तो इसकी जानकारी पहले नहीं हुई थी, आप लोगों के माध्यम से पता चला कि वो ‘टॉप गन’ बन गई है। बहुत खुशी हो रही है कि मेरी बेटी इतना आगे बढ़ रही है और देश में बाउर गांव का नाम रोशन कर रही है। आज भावना की वजह से आप लोग हमारे घर तक पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि जब भी भावना के गांव आने की खबर मिलती है, लोग उनसे मिलने के लिए जुट जाते हैं। अब ‘टॉप गन’ भावना कंठ की गांव की 3 तस्वीरें देखिए भावना की उपलब्धियों के बीच लोगों का सवाल- गांव की कब बदलेगी तस्वीर? एक तरफ बाउर की रहने वाली भावना की देश में चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ बाउर गांव के रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले डॉ. मानस बिहारी वर्मा और अब भावना कंठ की देश में चर्चा हो रही है, लेकिन फिर भी इन दोनों के गांव की स्थिति बदतर है। गांव के लोग आज भी सड़क, जलजमाव और पुनर्वास जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। बाउर गांव कमला नदी के किनारे बसा है। हर साल बाढ़ की समस्या से गांव के लोगों को जुझना पड़ता है। नदी में बारिश के दौरान पानी के बढ़ते ही गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से कट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार सरकार और प्रशासन से गांव के पुनर्वास की मांग कर चुके हैं। बारिश के दिनों में सड़क डूबने के कारण आवागमन सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि देश का नाम रोशन करने वाले इस गांव की पहचान उसकी बदहाली से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभाओं से हो। अब जानिए कौन हैं डॉ. मानस बिहारी वर्मा? भावना कंठ की सफलता के पीछे दरभंगा के महान वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी वर्मा की प्रेरणा भी रहे। डॉ. वर्मा, भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी सहयोगी रहे। डॉ. मानस बिहारी वर्मा 1986 में तेजस फाइटर जेट विमान बनाने वाले वैज्ञानिकों की टीम में शामिल थे। उस समय लगभग 700 इंजीनियर इस टीम में शामिल थे। डॉ. मानस बिहारी वर्मा ने इस टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान दिया था। उनके नेतृत्व में बने फाइटर जेट ने पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 काे भरी। विंग कमांडर राजीव कोठियाल इसके पहले पायलट बने। तब डॉ. कलाम ने फोन कर उन्हें कहा था- आपका विमान उड़ गया। रिटायरमेंट से पहले मानस बिहारी 2002 से 2005 तक एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी एडीए बेंगलुरू के निदेशक रहे। परिवार के लोगों के अनुसार, डॉ. मानस बिहारी वर्मा भावना के रिश्ते में दादा लगते थे। दोनों परिवार पड़ोसी रहे हैं। बचपन में भावना को उनसे प्रेरणा मिली, जिसने उनके भीतर देश की सेवा का सपना और मजबूत किया।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles