गुमला| नगर परिषद में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। शहर के विकास की थमी हुई रफ्तार और प्रशासनिक गतिरोध के बीच दो अप्रैल को नगर परिषद सभागार में बैठक बुलाई गई है। ईओ द्वारा जारी पत्र के अनुसार दो अप्रैल को दिन के 11:30 बजे से नप सभागार में नवनिर्वाचित बोर्ड का स्वागत सह परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें केवल पार्षद ही नहीं बल्कि स्थानीय सांसद और विधायक को भी आमंत्रित किया गया है। सभी की मौजूदगी में स्वागत, संबोधन और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार विकास कार्यों पर चर्चा होनी है। दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों का एक बड़ा खेमा इस बैठक के बहिष्कार की रणनीति बना रहा है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की मॉनिटरिंग में इस बात पर मंथन चल रहा है कि क्या इस बैठक में शामिल होना उचित होगा। चर्चा है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच उपजा अविश्वास इतना गहरा है कि महज एक औपचारिक बैठक से इसे पाट पाना चुनौतीपूर्ण लग रहा है। जबकि पार्षदों का एक गुट विकास का पक्षधर है। उनका मानना है कि आपसी कटुता को भुलाकर इस बैठक को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। इन पार्षदों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। यदि हम आपसी मतभेदों में उलझे रहे, तो शहर की जनता का नुकसान होगा। इस बैठक के बहाने संवादहीनता खत्म होनी चाहिए ताकि शहर के रुके हुए काम फिर से शुरू हो सकें। बहरहाल अब दो अप्रैल को ही पता चलेगा कि जनप्रतिनिधि-अधिकारी साथ कदम बढ़ाते है या विवाद की जड़े गहराती है।
