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धनबाद में दुर्गापूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। शहर के अलग-अलग इलाकों में आकर्षक पूजा पंडाल तैयार किए गए हैं। स्टील गेट, झारखंड मैदान, धनसार और न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी के पंडाल अपनी अनोखी थीम से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। सभी पंडालों के पट खुल गए हैं। स्टील गेट पंडाल में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों की संस्कृति दर्शाई गई है। बाहरी हिस्सा राष्ट्रीय पक्षी मोर की थीम पर है। इस पंडाल का बजट करीब 40 से 42 लाख रुपए है। धनसार में 1 लाख पौधों से सजा पंडाल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। दुर्गापूजा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
स्टील गेट पंडाल का उद्घाटन उपायुक्त आदित्य रंजन ने किया। उन्होंने बताया कि दुर्गापूजा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी हो रही है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है। इधर, झारखंड मैदान स्थित सत्यम शिवम सुंदरम पूजा समिति के पंडाल का उद्घाटन विधायक राज सिन्हा ने किया। इस वर्ष समिति अपना 27वां दुर्गापूजा आयोजन कर रही है। यहां हर साल मेले का भी आयोजन किया जाता है। पंडाल में आदिवासी संस्कृति से प्रेरित इंडोनेशियाई थीम पर तैयार
इस बार पंडाल को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की आदिवासी संस्कृति से प्रेरित इंडोनेशियाई थीम पर तैयार किया गया है। पंडाल की सजावट और कलाकृतियां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। उद्घाटन के दौरान विधायक राज सिन्हा ने मां भवानी से सभी के कल्याण की कामना की। दूसरी ओर, धनसार दुर्गापूजा समिति ने पर्यावरण संरक्षण की थीम पर पंडाल तैयार किया है। करीब एक लाख पौधों से सजे इस पंडाल में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है। पंडाल का बाहरी हिस्सा भगवान जगन्नाथ के चेहरे के आकार में बनाया गया है, जिसे तैयार करने में बांस के करीब 40 हजार छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। कृत्रिम बरगद के पेड़ को वन देवी का रूप दिया गया
पंडाल को तीन हिस्सों में सजाया गया है। पहले हिस्से में पर्यावरण संरक्षण, झरिया की आग और सनातन संस्कृति से जुड़े संदेश दिए गए हैं। दूसरे हिस्से में कृत्रिम बरगद के पेड़ को वन देवी का रूप दिया गया है। तीसरे हिस्से में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। प्रतिमाओं को पेड़-पत्तों के बीच प्राकृतिक स्वरूप दिया गया है। सामने तुलसी का पौधा लगाकर उसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया गया है। करीब 17 लाख रुपए की लागत से तैयार इस पंडाल में विद्युत सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। धनसार पूजा समिति वर्ष 1946 से दुर्गापूजा का आयोजन कर रही है। पंडाल देखने पहुंच रहे श्रद्धालु पर्यावरण संरक्षण के संदेश की सराहना कर रहे हैं। वहीं, न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी श्री श्री दुर्गापूजा समिति ने इस बार देशभर की आदिवासी संस्कृति की झलक को अपनी थीम में शामिल किया है। अंदरूनी हिस्से को गुपचुप से सजाया गया है
पंडाल के बाहरी हिस्से में आदिवासी संस्कृति को दर्शाया गया है, जबकि अंदरूनी हिस्से को गुपचुप से सजाया गया है। समिति की महासचिव ने बताया कि आजकल गुपचुप का चलन काफी लोकप्रिय है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ अलग करने के उद्देश्य से यह थीम तैयार की गई है। पंडाल निर्माण पर करीब साढ़े सात लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा पर 80 हजार रुपए और विद्युत सज्जा पर करीब दो लाख रुपये खर्च किए गए हैं। चारों पंडालों की अलग-अलग थीम श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। मां दुर्गा के दर्शन के साथ लोग पंडालों की सजावट और कलाकृतियों को देखने पहुंच रहे हैं। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है, ताकि दुर्गापूजा का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
धनबाद में दुर्गापूजा शुरू, पंडालों में दिख रहीं अनोखी थीम:स्टील गेट में आदिवासी संस्कृति, धनसार में 1 लाख पौधे-गोलगप्पे से सजा पंडाल
