् भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। कई गांवों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, जलमीनार खराब हैं और चापाकलों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। इसके कारण आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के विभिन्न हिस्सों से पेयजल संकट की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, भंडरा प्रखंड के कई गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भैसमुंदो गांव में जलमीनार पिछले कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है, जबकि आसपास के कई टोलों में महीनों से पानी की आपूर्ति बंद है। ग्रामीणों को मजबूरन दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, जिन्हें प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी जुटाना पड़ता है। कुडू प्रखंड के डोरोटोली गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार और अन्य जल योजनाएं होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं के रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश सुविधाएं बेकार पड़ी हुई हैं। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत नहीं किए जाने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्र भी पेयजल संकट से अछूता नहीं है। लोहरदगा बस स्टैंड, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है और जहां से हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहां तक पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में यात्रियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण सावित्री देवी ने बताया कि उन्हें रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि घर में छोटे बच्चे होने के बावजूद पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। रीना कुमारी ने बताया कि सरकार की नल-जल योजना कुछ दिनों तक चली, लेकिन बाद में बंद हो गई और अब लोग फिर पुराने चापाकलों के भरोसे हैं। मीना देवी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शहर के निवासी रमेश उरांव ने कहा कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर भी पानी की व्यवस्था नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं सुनील भगत ने कहा कि कई जलमीनार खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो रही है। यदि समय पर ध्यान दिया जाता तो आज लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों के संरक्षण की कमी और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संकट और विकराल रूप ले सकता है। फिलहाल जिलेवासी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप, खराब जलमीनारों की मरम्मत, नियमित जलापूर्ति तथा स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।
नलजल योजनाएं बंद, जलमीनार खराब और चापाकल से भी नहीं आ रहा है पानी
् भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। कई गांवों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, जलमीनार खराब हैं और चापाकलों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। इसके कारण आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के विभिन्न हिस्सों से पेयजल संकट की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, भंडरा प्रखंड के कई गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भैसमुंदो गांव में जलमीनार पिछले कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है, जबकि आसपास के कई टोलों में महीनों से पानी की आपूर्ति बंद है। ग्रामीणों को मजबूरन दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, जिन्हें प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी जुटाना पड़ता है। कुडू प्रखंड के डोरोटोली गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार और अन्य जल योजनाएं होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं के रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश सुविधाएं बेकार पड़ी हुई हैं। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत नहीं किए जाने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्र भी पेयजल संकट से अछूता नहीं है। लोहरदगा बस स्टैंड, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है और जहां से हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहां तक पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में यात्रियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण सावित्री देवी ने बताया कि उन्हें रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि घर में छोटे बच्चे होने के बावजूद पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। रीना कुमारी ने बताया कि सरकार की नल-जल योजना कुछ दिनों तक चली, लेकिन बाद में बंद हो गई और अब लोग फिर पुराने चापाकलों के भरोसे हैं। मीना देवी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शहर के निवासी रमेश उरांव ने कहा कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर भी पानी की व्यवस्था नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं सुनील भगत ने कहा कि कई जलमीनार खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो रही है। यदि समय पर ध्यान दिया जाता तो आज लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों के संरक्षण की कमी और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संकट और विकराल रूप ले सकता है। फिलहाल जिलेवासी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप, खराब जलमीनारों की मरम्मत, नियमित जलापूर्ति तथा स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।
