झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब केवल अंगीभूत कॉलेजों ही नहीं, बल्कि सभी एफिलिएटेड कॉलेजों में भी छात्रसंघ चुनाव अनिवार्य होंगे। नई नियमावली के तहत छात्रसंघ का पूरा ढांचा ही बदला जा रहा है। नई व्यवस्था में हर विश्वविद्यालय में एक विश्वविद्यालय छात्रसंघ और हर कॉलेज में अलग छात्रसंघ का गठन किया जाएगा। विवि और कॉलेज दोनों छात्रसंघ का कार्यकाल एक साल का होगा और चुनाव हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कराए जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि छात्रसंघ पूरी तरह गैर-राजनीतिक होंगे। किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ाव या राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर संबंधित छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नई नियमावली में छात्रसंघों में पहली बार महिला प्रतिनिधि और आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी, एसटी, पीवीटीजी) के लिए अलग पद बनाए गए हैं। वहीं छात्रसंघों में उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और उप सचिव जैसे पुराने पद पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं। अब हर विभाग और कक्षा से छात्र प्रतिनिधि का चयन किया जाएगा। इनमें खेल, एनएसएस, एनसीसी और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े छात्रों को नामित सदस्य बनाया जाएगा। नया छात्रसंघ ढांचा विश्वविद्यालय और कॉलेजों स्तर पर बनेगी छात्र परिषद छात्रसंघ के साथ छात्र परिषद का भी गठन होगा। विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति इसके संरक्षक होंगे। कॉलेजों में प्राचार्य एक वरिष्ठ शिक्षक को समन्वयक नियुक्त करेंगे। परिषद स्टूडेंट्स से जुड़े नीतिगत मामलों पर चर्चा करेगी। बैठकों और कैंपस व्यवस्था के लिए नए नियम : नई व्यवस्था में छात्रसंघ की बैठक के लिए एक-तिहाई सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी। कैंपस में किसी गंभीर घटना की स्थिति में 12 घंटे के भीतर पुलिस को सूचना देना भी अनिवार्य किया गया है।
नवगठित छात्रसंघ पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहेगा:बदलाव; झारखंड में छात्रसंघ चुनाव अब एफिलिएटेड कॉलेजों में भी होंगे
झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब केवल अंगीभूत कॉलेजों ही नहीं, बल्कि सभी एफिलिएटेड कॉलेजों में भी छात्रसंघ चुनाव अनिवार्य होंगे। नई नियमावली के तहत छात्रसंघ का पूरा ढांचा ही बदला जा रहा है। नई व्यवस्था में हर विश्वविद्यालय में एक विश्वविद्यालय छात्रसंघ और हर कॉलेज में अलग छात्रसंघ का गठन किया जाएगा। विवि और कॉलेज दोनों छात्रसंघ का कार्यकाल एक साल का होगा और चुनाव हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कराए जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि छात्रसंघ पूरी तरह गैर-राजनीतिक होंगे। किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ाव या राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर संबंधित छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नई नियमावली में छात्रसंघों में पहली बार महिला प्रतिनिधि और आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी, एसटी, पीवीटीजी) के लिए अलग पद बनाए गए हैं। वहीं छात्रसंघों में उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और उप सचिव जैसे पुराने पद पूरी तरह खत्म कर दिए गए हैं। अब हर विभाग और कक्षा से छात्र प्रतिनिधि का चयन किया जाएगा। इनमें खेल, एनएसएस, एनसीसी और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े छात्रों को नामित सदस्य बनाया जाएगा। नया छात्रसंघ ढांचा विश्वविद्यालय और कॉलेजों स्तर पर बनेगी छात्र परिषद छात्रसंघ के साथ छात्र परिषद का भी गठन होगा। विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति इसके संरक्षक होंगे। कॉलेजों में प्राचार्य एक वरिष्ठ शिक्षक को समन्वयक नियुक्त करेंगे। परिषद स्टूडेंट्स से जुड़े नीतिगत मामलों पर चर्चा करेगी। बैठकों और कैंपस व्यवस्था के लिए नए नियम : नई व्यवस्था में छात्रसंघ की बैठक के लिए एक-तिहाई सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होगी। कैंपस में किसी गंभीर घटना की स्थिति में 12 घंटे के भीतर पुलिस को सूचना देना भी अनिवार्य किया गया है।


