
मुख्य बातें:
Indian Citizenship Special Camp: किशनगंज जिला प्रशासन ने नागरिकता संशोधन व प्राप्ति की जटिल प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए पूरे जिले में एक व्यापक महाअभियान शुरू करने का फैसला किया है. जिलाधिकारी (DM) नवीन कुमार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, आगामी 8 जुलाई, 15 जुलाई और 22 जुलाई 2026 को जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों में विशेष नागरिकता शिविर (Special Citizenship Camps) आयोजित किए जाएंगे. इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्र के उन सैकड़ों परिवारों में खुशी की लहर है जिनके यहां नेपाल से वैवाहिक संबंध जुड़े हैं.
“अतिमहत्वपूर्ण” श्रेणी में अभियान; गांव-गांव तक प्रचार का जिम्मा
- अधिकारियों को सख्त निर्देश: जिलाधिकारी ने जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को इस अभियान को ‘अतिमहत्वपूर्ण’ श्रेणी में रखने का निर्देश दिया है.
- जनजागरूकता पर जोर: कई पात्र लोग केवल सही जानकारी और प्रक्रिया के अभाव में अब तक आवेदन नहीं कर पाए थे. इसके समाधान के लिए स्थानीय भाषा में गांव-गांव तक माइकिंग, सूचना प्रसारण और पंचायती स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति छूटे नहीं.
इन धाराओं के तहत लिए जाएंगे आवेदन; समयबद्ध होगी स्क्रूटनी
विशेष शिविरों में आवेदनों के संधारण और विधिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए रोस्टर तैयार किया गया है, जिसका विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| शिविर की निर्धारित तिथियां | नागरिकता अधिनियम की मुख्य धाराएं | प्रशासनिक प्रक्रिया और अगला कदम |
| 08 जुलाई 2026 (बुधवार) | धारा 5(1)(C): भारत में विवाह के बाद रह रही नेपाली महिलाओं/अन्य के पंजीकरण हेतु. | शिविर में आवेदनों का भौतिक सत्यापन कर तत्काल पंजीकरण किया जाएगा. |
| 15 जुलाई 2026 (बुधवार) | धारा 6(1): देशीयकरण (Naturalisation) के तहत नागरिकता चाहने वाले पात्र आवेदकों हेतु. | सभी प्राप्त आवेदनों को आवश्यक अभिलेखों के साथ जिला सामान्य प्रशासन शाखा भेजा जाएगा. |
| 22 जुलाई 2026 (बुधवार) | छूटे हुए सभी श्रेणी के पात्र आवेदकों के लिए अंतिम विशेष अवसर. | जिला स्तर पर स्क्रूटनी के बाद अग्रिम अनुशंसा हेतु गृह मंत्रालय को फाइलें भेजी जाएंगी. |
Indian Citizenship Special Camp: सीमावर्ती क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा यह कदम
किशनगंज जिला भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है. इस वजह से यहां सदियों से रोटी-बेटी का पारंपरिक सांस्कृतिक संबंध रहा है.
नेपाल से ब्याह कर भारत आईं कई महिलाएं वर्षों से तकनीकी और कागजी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण भारतीय नागरिकता और मतदान के संवैधानिक अधिकारों से वंचित थीं. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिविरों में आवेदकों को पूरी सहायता दी जाएगी. जिलाधिकारी ने सभी इच्छुक और योग्य लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों पर आवश्यक मूल दस्तावेजों और पहचान पत्रों के साथ अपने-अपने प्रखंड कार्यालय परिसर में पहुंचें और इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं.
शिविरों में तैनात रहने वाले नोडल अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को विशेष प्रशिक्षण दे दिया गया है, ताकि प्राप्त आवेदनों की डिजिटल एंट्री और भौतिक संधारण में किसी भी स्तर पर त्रुटि न हो और पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सके.


