
West Bengal Panchayat Bill: पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है. राज्य के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने कहा है कि अब त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत प्रधानों (Panchayat Pradhans) के हाथों से सभी वित्तीय अधिकार और बिलों पर हस्ताक्षर करने की शक्ति (Signatory Authority) पूरी तरह वापस ले ली जायेगी. भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में ‘वेस्ट बंगाल पंचायत एक्ट 1973’ में संशोधन के लिए एक नया बिल पेश करने जा रही है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने इसके पीछे की वजह भी बतायी. दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न विकास कार्यों के बिल पास करने और वित्तीय लेन-देन के एवज में हस्ताक्षर करने की शक्ति के कारण जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और आपसी हिंसा की घटनाएं हो रही थीं. कई राज्यों के सफल मॉडल को देखते हुए अब यह शक्ति सरकारी अधिकारियों (जैसे एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट) को ट्रांसफर की जायेगी.
प्रधानों का ‘लापता’ होना और प्रशासनिक ठप होना
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है. राज्य की कुल 3,354 ग्राम पंचायतों में से 3,200 से अधिक पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नियंत्रण था. वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत पंचायत प्रधान दफ्तर नहीं आ रहे हैं या ‘फरार/लापता’ हैं. उनके गायब होने की वजह से विकास योजनाएं पूरी तरह ठप हैं.
ये भी पढ़ें: अभी अंडे बरस रहे थे, अब ईंटें चलेंगी, 2,000 से ज्यादा फरार पंचायत प्रधानों को मंत्री दिलीप घोष की चेतावनी
125 दिन के रोजगार और वेतन भुगतान पर संकट
पंचायत प्रधानों की गैर-मौजूदगी के कारण ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्यों, विशेषकर विकसित भारत जी रामजी (VB-G RAM G) योजना के तहत 125 दिनों के रोजगार कार्यक्रम को मंजूरी देने और मजदूरों के बैंक खातों में समय पर वेतन भेजने का काम पूरी तरह से रुक गया है. नियमों के मुताबिक, काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान न होने पर राज्य सरकार को मुआवजा देना पड़ता है. इसकी वजह से वित्तीय बोझ बढ़ रहा था. इसी वित्तीय गतिरोध को तोड़ने के लिए नौकरशाही को वित्तीय कमान सौंपी जा रही है.
ये भी पढ़ें: कोलकाता के फुटपाथ जल्द ही हॉकरों से मुक्त होंगे, भाजपा नेता दिलीप घोष का बड़ा बयान
एक सप्ताह में सुधर जायेगी पूरी व्यवस्था : घोष
मंत्री दिलीप घोष ने माना कि इस नये कानून और अधिकारों के हस्तांतरण के कारण शुरुआत में थोड़ी प्रशासनिक असुविधा जरूर हो सकती है, लेकिन सरकार इससे निपट लेगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर सभी पंचायतों में सरकारी अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही तय कर व्यवस्था को सुचारु रूप से पटरी पर ला दिया जायेगा. मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पश्चिम बंगाल के लिए 1 लाख अतिरिक्त घरों को मंजूरी दी है, जिसके लिए लाभार्थियों की पहचान का सर्वे का काम तेजी से चल रहा है.

