ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री पशुधन 6 योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में कोडरमा जिले में 1119 लाभुकों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बकरी, सूकर, ब्रायलर मुर्गी, बैकयार्ड लेयर, बत्तख और भेड़ पालन के लिए 75 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विनीता कुमारी ने बताया कि इच्छुक पशुपालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। जिले में बत्तख चूजा वितरण योजना के तहत 502, बकरा विकास योजना में 496, ब्रायलर कुक्कुट पालन में 127, सूकर विकास में 74, बैकयार्ड लेयर कुक्कुट पालन में 70 और भेड़ पालन योजना में 53 लाभुकों का लक्ष्य है। बकरा विकास योजना में 8 मादा + 2 नर, सूकर में 4 मादा + 1 नर, ब्रायलर में 500 चूजा, बैकयार्ड लेयर में 400 चूजा, बत्तख योजना में 30 चूजा और भेड़ पालन में 8 मादा + 2 नर की यूनिट निर्धारित है। वहीं व्यवसायिक बकरा-बकरी पालन योजना में 100 मादा बकरी + 5 नर बकरा वाली यूनिट के लिए जिले में 11 यूनिट का लक्ष्य है। लाभुक के पास कम से कम 0.50 एकड़ जमीन स्वयं की अथवा कम से कम 10 वर्ष की लीज पर होना जरूरी है। भूमि का सत्यापन प्रमाणपत्र के माध्यम से किया जाएगा। 90% अनुदान में विशेष वर्गों को प्राथमिकता 75 प्रतिशत अनुदान वाली योजनाओं में जिले के सभी वर्गों के पात्र पशुपालकों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ मिलेगा। 90 प्रतिशत अनुदान वाली योजनाओं में एससी/एसटी, असहाय विधवा महिला, दिव्यांग तथा 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के निःसंतान दंपती को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले लाभुक अंशदान, फिर मिलेगा अनुदान चयनित लाभुक को निर्धारित लाभुक अंशदान एस्क्रो खाते में जमा करना होगा। इसके बाद अनुदान राशि खाते में हस्तांतरित होगी। पशु-पक्षियों की आपूर्ति के बाद लाभुक अंशदान और अनुदान की राशि एकमुश्त आपूर्तिकर्ता के खाते में भेजने का प्रावधान है। पिछले पांच वर्षों में संबंधित सरकारी अनुदान योजना का लाभ ले चुके परिवारों को दोबारा अनुदान नहीं मिलेगा। कहां से मिलेगा आवेदन इच्छुक पशुपालक संबंधित प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी या भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी से निर्धारित आवेदन प्रपत्र और योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग की सूचना के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 10 जुलाई 2026 निर्धारित थी।
